बैतूल का कुकरू प्राकृतिक सुंदरता, कॉफी बागानों और जनजातीय संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। अब 15 करोड़ की पर्यटन परियोजना से यहां ईको टूरिज्म और रोजगार को नई रफ्तार मिलेगी।

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की भैंसदेही तहसील में स्थित कुकरू अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हरियाली और शांत वातावरण के कारण तेजी से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। समुद्र तल से करीब 3,668 फीट की ऊंचाई पर बसे इस रमणीय स्थल पर मानसून के दौरान बादलों, घने जंगलों और कोहरे का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। यहां बहने वाली अदना नदी, मिश्रित वन और तेलिया सागौन के विशाल वृक्ष इसकी प्राकृतिक पहचान को और खास बनाते हैं।

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सालभर सुहावना मौसम रहने के कारण यह स्थान प्रकृति प्रेमियों के साथ-साथ ट्रैकिंग, बाइकिंग और एडवेंचर पसंद करने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। कुकरू में मौजूद सनराइज प्वाइंट और सनसेट प्वाइंट यहां आने वाले पर्यटकों को यादगार अनुभव देते हैं। इसके अलावा यह क्षेत्र कॉफी उत्पादन के साथ-साथ कोदो-कुटकी, शहद, आंवला, हर्रा, बहेड़ा, सफेद मूसली और भिलवा जैसी वन उपज के लिए भी जाना जाता है। स्थानीय मोटे अनाज से तैयार पारंपरिक व्यंजन और वन उत्पादों से बने हस्तशिल्प यहां की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाते हैं।

Kukru Coffee Garden: 80 साल पुरानी कॉफी की विरासत आज भी कायम

कुकरू-खामला क्षेत्र अपनी ऐतिहासिक कॉफी खेती के कारण भी विशेष पहचान रखता है। यहां वर्ष 1944 में पहली बार कॉफी की खेती शुरू की गई थी। इसी वजह से यह इलाका मध्यप्रदेश के महत्वपूर्ण कॉफी उत्पादक क्षेत्रों में शामिल हो गया। करीब 110 एकड़ क्षेत्र में फैले कॉफी उद्यान में लगभग 10 एकड़ भूमि पर उच्च गुणवत्ता वाली अरेबिका कॉफी की खेती की जा रही है। इन कॉफी बागानों के संरक्षण और विकास का कार्य मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड और वन विभाग मिलकर कर रहे हैं, ताकि आने वाले समय में यह क्षेत्र पर्यटन और कृषि दोनों क्षेत्रों में नई पहचान बना सके।

MP Tourism: मुख्यमंत्री मोहन यादव की बड़ी घोषणा, बनेगा नया पर्यटन सर्किट

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में कुकरू का दौरा कर इसे मध्यप्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में विकसित करने की घोषणा की है। सरकार करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से कुकरू, चिखलदरा, मुक्तागिरी और मेलघाट को जोड़ते हुए एक एकीकृत पर्यटन सर्किट विकसित करेगी।

इस परियोजना के तहत ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ सनराइज और सनसेट प्वाइंट का आधुनिक रूप से विकास किया जाएगा। इसके अलावा अत्याधुनिक सुविधाओं वाले ईको रिसॉर्ट तैयार किए जाएंगे। पर्यटन अधोसंरचना मजबूत करने के साथ ट्रैकिंग, नेचर ट्रेल्स और अन्य साहसिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे यहां आने वाले पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।

Homestay Scheme: जनजातीय परिवारों के लिए रोजगार के नए अवसर

पर्यटन विकास के साथ स्थानीय लोगों को भी इसका लाभ मिले, इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनजातीय परिवारों के लिए होमस्टे योजना शुरू करने की घोषणा की है। इन होमस्टे का संचालन मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम की व्यवस्था के अनुसार किया जाएगा। पर्यटक मध्यप्रदेश टूरिज्म के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए इनकी बुकिंग कर सकेंगे। इस योजना से स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे। साथ ही पर्यटकों को जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय जीवनशैली को करीब से देखने और समझने का अवसर मिलेगा।

How to Reach Kukru: कुकरू पहुंचना अब पहले से ज्यादा आसान

राजधानी भोपाल से कुकरू की दूरी लगभग 270 किलोमीटर है, जबकि बैतूल से यह स्थान करीब 90 किलोमीटर दूर स्थित है। रेल मार्ग से भोपाल और बैतूल के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस समेत कई नियमित ट्रेन सेवाएं उपलब्ध हैं। बैतूल पहुंचने के बाद टैक्सी और स्थानीय वाहनों के माध्यम से आसानी से कुकरू पहुंचा जा सकता है। सड़क मार्ग से भोपाल, बैतूल और शाहपुर होते हुए भी यहां पहुंचना सुविधाजनक है। अंतिम पर्वतीय रास्ता हरियाली और प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर है, जो यात्रा को और भी यादगार बना देता है।

Eco Tourism in Madhya Pradesh: प्रकृति, संस्कृति और रोमांच का शानदार अनुभव

कुकरू उन चुनिंदा पर्यटन स्थलों में शामिल है जहां प्राकृतिक सौंदर्य, कॉफी बागान, जनजातीय संस्कृति और ईको टूरिज्म का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यहां मौजूद ईको टूरिज्म सेंटर में पर्यटकों के ठहरने के लिए रेस्ट हाउस की सुविधा उपलब्ध है। मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड (MPEDB) द्वारा प्रशिक्षित स्टाफ पर्यटकों को आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराता है। विशेष रूप से मानसून के मौसम में चारों ओर फैली हरियाली, बादल और शांत वातावरण कुकरू को मध्यप्रदेश के सबसे खूबसूरत प्रकृति पर्यटन स्थलों में शामिल कर देते हैं।