मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड की STDW परियोजना को यूएन वूमेन ने सराहा। महिला सुरक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में इसे प्रेरणादायक पहल बताया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा के विज़न को आगे बढ़ाते हुए मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड प्रदेश में 'महिलाओं के लिए सुरक्षित पर्यटन स्थल (Safe Tourist Destination for Women-STDW)' परियोजना का संचालन कर रहा है। इसी पहल के तहत आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम में यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव सुश्री शोको इशिकावा ने परियोजना से जुड़ी प्रशिक्षित बालिकाओं और महिलाओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने उनके अनुभव सुने और परियोजना से मिले सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली।

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महिला सुरक्षित पर्यटन परियोजना पर यूएन विमेन की विशेष बैठक

एमपी टूरिज्म बोर्ड में आयोजित इस संवाद कार्यक्रम के दौरान यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव शोको इशिकावा ने परियोजना से जुड़ी बालिकाओं के साथ विस्तार से बातचीत की। उन्होंने प्रशिक्षण के बाद उनके आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और विभिन्न कौशलों में आए बदलावों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए सुरक्षित और समावेशी पर्यटन व्यवस्था तैयार करने की दिशा में मध्यप्रदेश की यह पहल एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभर रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस परियोजना की सबसे बड़ी ताकत स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी है, जिससे महिलाओं को सुरक्षित माहौल और नए अवसर दोनों मिल रहे हैं।

मध्यप्रदेश को महिला पर्यटकों के लिए सबसे सुरक्षित पर्यटन राज्य बनाने का लक्ष्य

एमपी टूरिज्म बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक श्री अभय अरविंद बेडेकर ने कहा कि विभाग का उद्देश्य मध्यप्रदेश को महिला पर्यटकों के लिए देश का सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद पर्यटन गंतव्य बनाना है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा, कौशल विकास और सामुदायिक सहभागिता को एक साथ जोड़कर लगातार काम किया जा रहा है। इन प्रयासों से महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं, वहीं पर्यटन क्षेत्र भी अधिक समावेशी और सशक्त बनता जा रहा है।

हस्तनिर्मित उत्पादों ने दिखाई महिलाओं की आत्मनिर्भरता

कार्यक्रम के दौरान STDW परियोजना से जुड़ी महिलाओं और बालिकाओं ने अपने हाथों से तैयार किए गए विभिन्न हस्तशिल्प अतिथियों को भेंट किए। इनमें हस्तनिर्मित स्मृति चिन्ह, फैब्रिक ज्वेलरी और फेंगशुई आधारित कलाकृतियां प्रमुख रूप से शामिल थीं। इन उत्पादों ने स्थानीय कला, रचनात्मकता और महिलाओं की मेहनत को सामने रखा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यह परियोजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी भूमिका निभा रही है।

कौशल विकास और सामुदायिक सहभागिता मॉडल की हुई सराहना

बैठक के दौरान यूएन विमेन के प्रतिनिधिमंडल ने परियोजना के तहत विकसित किए गए कौशल प्रशिक्षण मॉडल, सामुदायिक सहभागिता और महिलाओं में आए सकारात्मक बदलावों की प्रशंसा की। प्रतिनिधिमंडल ने इस पहल को प्रभावी, प्रेरणादायक और अन्य क्षेत्रों के लिए भी अनुकरणीय बताया। इस अवसर पर यूएन विमेन इंडिया की कंट्री डिप्टी रिप्रेजेंटेटिव सुश्री कांता सिंह तथा स्टेट रिप्रेजेंटेटिव सुश्री जोयात्री राय भी मौजूद रहीं।