UCC In Madhy Pradesh: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में UCC लागू करने को लेकर क्या बड़ा ऐलान किया है? प्रस्तावित UCC में जनजातीय समुदायों को लेकर सरकार का क्या रुख है? UCC का मसौदा तैयार करने के लिए गठित समिति की अध्यक्षता कौन कर रहा है और उसका क्या काम है?

देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) को लेकर बहस और चर्चा के बीच मध्यप्रदेश से एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संकेत सामने आया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि प्रदेश में जुलाई 2026 के मानसून सत्र से पहले यूसीसी लागू करने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है।

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नई दिल्ली में आयोजित एक निजी न्यूज चैनल के कार्यक्रम 'इंडिया@2047 कॉन्क्लेव' में शामिल हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार इस विषय पर गंभीरता से आगे बढ़ रही है और इसके लिए उच्चस्तरीय समिति भी गठित की जा चुकी है।

यूसीसी लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है। यह समिति प्रदेश के विभिन्न जिलों में जाकर समाज के अलग-अलग वर्गों से सुझाव और राय ले रही है। सरकार का उद्देश्य ऐसा मॉडल तैयार करना है जो व्यापक जनभावनाओं और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि देश में पहले से तीन राज्य यूसीसी लागू कर चुके हैं और मध्यप्रदेश भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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जनजातीय समुदायों को मिलेगी छूट

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के जनजातीय समुदायों को यूसीसी के दायरे से अलग रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामाजिक व्यवस्थाओं के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता बनी रहेगी। सरकार इस विषय पर संवेदनशील दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रही है। डॉ. यादव ने कहा कि गुजरात सहित अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार के प्रावधान देखने को मिलते हैं।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार का उद्देश्य मध्यप्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन में मध्यप्रदेश की भूमिका को मजबूत बनाने के लिए शिक्षा, रोजगार, निवेश और आधारभूत संरचना पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

निवेश और रोजगार को लेकर सरकार का दावा

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उनके अनुसार पिछले वर्ष राज्य में करीब 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS-2025) में लगभग 30 लाख करोड़ रुपये के एमओयू साइन किए गए थे। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इन समझौतों का लगभग 30 प्रतिशत निवेश धरातल पर दिखाई देने लगा है और इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से अब तक दो लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं।

शिक्षा क्षेत्र में हुए बड़े बदलाव

डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2002-03 तक प्रदेश में केवल पांच मेडिकल कॉलेज थे, जबकि अब उनकी संख्या बढ़कर 30 हो चुकी है। इनमें से सात मेडिकल कॉलेज पिछले दो वर्षों में शुरू किए गए हैं। इसके अलावा प्रदेश में नए विश्वविद्यालयों और पीएम एक्सीलेंस कॉलेजों की स्थापना भी की गई है, जिससे उच्च शिक्षा को नई दिशा मिल रही है।

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने बताया कि सरकार स्वयं भी ईवी वाहनों के उपयोग को प्राथमिकता दे रही है, ताकि प्रदूषण कम करने और टिकाऊ विकास के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जा सके।

धर्म, संस्कृति और पर्यटन पर भी जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी धर्म का अपमान करना भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है, लेकिन अपने धर्म और विरासत पर गर्व करना गलत नहीं है। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, धार्मिक पर्यटन और धार स्थित भोजशाला के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे कदम स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी गति देते हैं।

लाड़ली बहना योजना पर भी दिया अपडेट

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने लाड़ली बहना योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश की पात्र महिलाओं को अब तक 36 किश्तों के माध्यम से लगभग 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है।

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