राजस्थान के भरतपुर शहर से शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां सरकारी हॉस्पिटल में सोनोग्राफी मशीन होने के बाद भी प्रेग्नेंट महिला को निजी सेंटर भेजा गया। नतीजा- बीच रास्ते ई रिक्शा में हुआ लेबर पेन (labor pain) तो शॉल की ओट बना कराई गई डिलेवरी।

भरतपुर (bharatpur). राजस्थान सरकार का मुफ्त दवा और मुफ्त जांच सिस्टम पूरे देश के किसी भी राज्य में सबसे आगे है। सरकार हर साल हजारों करोड़ों रुपया इस पर खर्च करती है, लेकिन उसके बाद भी सरकार के ही कुछ नुमाइंदे इस इतनी बड़ी योजना का सत्यानाश करने पर तुले हुए हैं। अपने चंद रुपयों के कमीशन के लालच में नवजात बच्चों की जान से खेलने पर भी इनको गुरेज नहीं है। भरतपुर जिले से अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का एक और बड़ा केस सामने आया है। अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन होने के बाद भी कमीशन के लालच में सोनेाग्राफी नहीं की और गर्भवती को निजी सोनोग्राफी सेंटर भेज दिया गया। गर्भवती ने ई रिक्शा में ही बच्चे को जन्म दे दिया। हालांकि इस घटनाक्रम में अभी तक किसी भी कार्मिक पर कार्रवाई नहीं की गई है।

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क्रिटिकल हालत में पहुंची सरकारी अस्पताल, फिर भी नहीं किया इलाज

दरअसल भरतपुर जिले के ही नहीं संभाग के सबसे बड़े जनाना अस्पताल के बाहर यह सब कुछ हुआ। भरतपुर जिले में स्थित जनाना अस्पताल में पूजा नाम की एक महिला बुधवार दोपहर अपने परिजनों के साथ अस्पताल में आई थी। वह आठ महीने और कुछ दिनों की गर्भवती थी। बेहद क्रिटिकल हालात में परिजन ई रिक्शा में उसे लेकर जनाना अस्पताल आए थे। अस्पताल में दोपहर दो बजे के बाद सोनोग्राफी मशीन को बंद कर दिया गया था। लेकिन क्रिटिकल हालात के बावजूद भी अस्पताल प्रशासन ने सोनोग्राफी कराने से मना कर दिया।

परिजन अस्पताल प्रशासन से करते रहे गुहार

परिजन हाथ जोड़ते रहे लेकिन अस्पताल प्रबंधन नहीं माना। उसने नजदीक ही एक निजी सोनोग्राफी सेंटर पर मरीज को भेज दिया। बेचारे परिजन मन मारकर प्रसूता को लेकर ई रिक्शा से निजी सेंटर पर जाने के लिए निकले। इसी दौरान अस्पताल के बाहर निकलते ही प्रसूता पूजा ने बच्चे को जन्म दे दिया। परिजनों ने बीच सड़क शाॅल से ई रिक्शा को लपेटा और उसके बाद जनाना अस्पताल में ही दोनो को भर्ती कराया। इस बारे में प्रबंधन से सोनोग्राफी स्टाफ की शिकायत की गई है। हांलाकि इस मामले में प्रबंधन ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

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