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कुंभलगढ़ फोर्ट के 600 साल पुराने इस शिवलिंग के सामने सावन सोमवार पर तांडव नृत्य करते थे महाराणा प्रताप के पूर्वज
सावन में देशभर के शिवालयों में भीड़ बढ़ जाती है, लेकिन प्राचीन मंदिरों में एक अलग उत्साह होता है। राजस्थान के राजसमंद जिले के कुंभलगढ़ फोर्ट में स्थित प्राचीन नीलकंठ शिव मंदिर में इन दिनों काफी भीड़ देखी जा रही है।

राजसमंद. सावन में देशभर के शिवालयों में भीड़ बढ़ जाती है, लेकिन प्राचीन मंदिरों में एक अलग उत्साह होता है। राजस्थान के राजसमंद जिले के कुंभलगढ़ फोर्ट में स्थित प्राचीन नीलकंठ शिव मंदिर में इन दिनों काफी भीड़ देखी जा रही है। इस मंदिर को 600 साल पहले यानी 1468 ईसवी में महाराणा प्रताप के पूर्वज महाराणा कुंभा ने कराया था। कहते हैं कि महाराणा कुंभा सावन सोमवार पर शिवलिंग के आगे तांडव नृत्य किया करते थे।
कुंभलगढ़ किला राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा किला माना जाता है। यहां दुनिया की सबसे बड़ी दीवार 'चीन की दीवार' के बाद दूसरी बड़ी दीवार है। कुंभलगढ़ किले में 600 साल पुराना शिव मंदिर है। इसे ही नीलकंठ मंदिर कहते हैं।
कुंभलगढ़ के नीलकंठ मंदिर में स्थापत शिवलिंग की ऊंचाई 6 फीट है, जबकि इसका बेस 3 फीट है। यानी कुल 9 फी ऊंचाई। यह शिवलिंग काले कसौटी पत्थर से निर्मित है। यह वही पत्थर है, जिससे सोने की शुद्धता की जांच होती रही है।
कहा जाता है कि महाराणा कुंभा की हाइट 7 फीट थी। वे सावन मास में बैठकर नीलकंठ महादेव की पूजा-अर्चना किया करते थे। उनकी आंखें शिवलिंग के समानांतर रहें, इसी वजह से शिवलिंग 6 फीट बनवाया गया था।
कहते हैं कि मेवाड़ की रियासत को जितने भी महाराजाओं ने चलाया, सभी ने इस शिवमंदिर में पूजा जारी रखी। यानी 600 साल से यहां पूजा होती आ रही है।
150 साल पहले महाराणा प्रताप के वशंज महाराणा फतेह सिंह ने नीलकंठ महादेव मंदिर की पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी आमेट परिवार को सौंपी थी। तब वे इन्हीं का परिवार मंदिर संभाल रहा है। मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण(ASI) के अधीन है।
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