राजस्थान में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने है। इस बीच प्रदेश की दो दिग्गज पार्टियों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी है। वहीं सीएम अशोक गहलोत प्रदेस में अपनी सरकार रिपीट करने का दावा कर रहे है। क्या कांग्रेस कर्नाटक और हिमाचल जैसा कारनामा करेगी।

जयपुर (jaipur News). राजस्थान में विधानसभा चुनाव में करीब 5 महीने से भी कम का समय बचा है। प्रदेश में अभी से ही चुनावी सरगर्मियां तेज हो चुकी है। भाजपा के प्रचार के लिए तो बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद राजस्थान के अजमेर में आए। लेकिन राजस्थान में हालात यह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अभी तक के मुख्यमंत्री पद का चेहरा डिसाइड नहीं कर पाई है। क्योंकि दोनों ही पार्टी के नेताओं के बीच आपसी खींचतान है। हालांकि कांग्रेस के नेताओं की आपसी खींचतान जगजाहिर है लेकिन भारतीय जनता पार्टी की किस्तान के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

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कर्नाटक और हिमाचल की तरह राजस्थान में कांग्रेस कर रही जीत की तैयारी

अब आपको बता दें कि दोनों ही इससे पहले कर्नाटक और हिमाचल में विधानसभा चुनाव हुए जहां भारतीय जनता पार्टी ने दावा किया था कि वह सरकार रिपीट कर लेंगे। लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा दोनों जगह कांग्रेस ने भाजपा को हरा दिया। अब राजस्थान में चुनाव नजदीक आने के साथ ही सीएम अशोक गहलोत भी सरकार रिपीट करने का दावा कर रहे हैं। बकायदा इसके लिए उन्होंने इस बार प्रदेश में 15 से ज्यादा नए जिले के संभाग फ्री बिजली जैसी बड़ी घोषणा कर दी है। लेकिन आपको बता दें कि राजस्थान में सरकार रिपीट होने की बात इतनी आसान नहीं है। क्योंकि राजस्थान में हर 5 साल बाद सरकार चेंज होने का सिस्टम बना हुआ है।

साल 1993 से रिपीट नहीं हुई भाजपा और कांग्रेस की सरकार

राजनीतिक जानकारों की माने तो जनता चाहती है कि 5 साल बाद क्यों न दूसरी पार्टी को मौका देकर देखा जाए। राजस्थान में 1993 से एक बार भाजपा और एक बार कांग्रेस की सरकार बनती आ रही है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि इस बार सीएम अशोक गहलोत ने जो घोषणा की है उससे नतीजे यह रह सकते हैं कि दोनों ही पार्टियों के बीच जीती हुई सीटों का अंतर कम रहने वाला है। भले ही जीत कोई भी हासिल करें।

राजस्थान में सरकार रिपीट करवाने की इच्छा को लेकर सीएम अशोक गहलोत लगातार दिन-रात मेहनत में लगे हुए हैं। बकायदा वह राजस्थान में अनेकों जिलों में हो रहे महंगाई राहत शिविरों में जाकर जनता से सीधा संवाद करे उनकी परेशानी जानने में लगे हुए हैं।

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