कोटा में एक और कोचिंग छात्र ने आत्महत्या कर ली है। प्रशासन ने पीजी में सुरक्षा मानकों की जांच शुरू कर दी है और कई जगहों पर खामियां पाई गई हैं। प्रशासन ने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

कोटा, राजस्थान का वह शहर जहां हर साल हजारों छात्र अपने भविष्य के सपने लेकर आते हैं, एक बार फिर छात्रों की सुरक्षा को लेकर चर्चा में है। हाल ही में विज्ञान नगर थाना क्षेत्र के अंबेडकर नगर में एक और कोचिंग छात्र द्वारा आत्महत्या की घटना सामने आई। इस साल यह तीसरी ऐसी घटना है जिसने कोटा में छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।गुरुवार की रात ओडिशा के रहने वाले छात्र अभिजीत गिरी ने आत्महत्या की। घटना के बाद जब जिला प्रशासन ने उस पीजी (पेइंग गेस्ट) का निरीक्षण किया, तो पाया गया कि वहां एंटी-हैंगिंग डिवाइस नहीं था। यह उपकरण आत्महत्या रोकने के लिए अनिवार्य है। इसके अलावा, कई अन्य पीजी में अग्निशमन यंत्र और सुरक्षा से जुड़े अन्य उपकरणों का भी अभाव पाया गया।

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पीजी में क्यों नहीं हो रहा गाइडलाइन्स का पालन

अंबेडकर नगर इलाके में कई पीजी संचालित हो रहे हैं। जिला प्रशासन की जांच में पाया गया कि अधिकांश पीजी में गाइडलाइन्स का पालन नहीं हो रहा है। छोटे-छोटे कमरों में बच्चों को असुरक्षित तरीके से रखा गया है। प्रवेश और निकासी के रास्तों को लेकर भी गंभीर खामियां हैं। जिला प्रशासन ने पीजी संचालकों को नोटिस जारी कर दिया है और गाइडलाइन्स का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। नोडल अधिकारी नरेश मालव ने बताया कि जहां भी अनियमितताएं मिलेंगी, वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम के मुख्य अग्निशमन अधिकारी राकेश व्यास ने भी सुरक्षा मानकों में लापरवाही की पुष्टि की।

कोचिंग संस्थानों और प्रशासन को यह करना चाहिए

ऐसी घटनाएं सिर्फ प्रशासनिक खामियों का ही नहीं, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहे दबाव का भी संकेत हैं। कोचिंग संस्थानों और प्रशासन को चाहिए कि वे छात्रों को मानसिक तनाव से राहत देने के लिए काउंसलिंग और अन्य सेवाओं पर भी ध्यान दें। जिला प्रशासन का कहना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए लगातार निरीक्षण और सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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