नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, जयपुर में बाघिन रानी के दो शावकों ने कठिन संघर्ष के बाद मौत को मात दी। पार्क के वन्यजीव चिकित्सकों और स्टाफ की मेहनत से दोनों शावक अब स्वस्थ हो रहे हैं। सफेद बाघ 'भीम' और मादा शावक 'स्कंदी' का जीवन एक प्रेरणादायक कहानी है।

जयपुर। राजधानी जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में हाल ही में एक दिल छू लेने वाली घटना घटी। जब बाघिन रानी ने 4 शावकों को जन्म दिया। दुर्भाग्यवश, इनमें से एक शावक मृत पैदा हुआ, जबकि दूसरा शावक अगले दिन ही मर गया। इससे बचने वाले दो शावकों को मां से अलग कर दिया गया, क्योंकि उनकी स्थिति बेहद कमजोर थी।

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मां से अलग रखकर स्वस्थ किए जा रहे बाकी बचे दो शावक

बस तभी से इन दोनों शावकों का संघर्ष शुरू हो गया। दोनो बच्चों ने हार नहीं मानी और मौत से संघर्ष करते हुए खुद को बचा लिया। पार्क में इन बाघ और लेपर्ड शावकों के कारण चहल.पहल देखने को मिल रही है। इन शावकों की देखभाल के लिए बायोलॉजिकल पार्क के वन्यजीव चिकित्सकों और स्टाफ ने दिन-रात मेहनत की। उन्हें समय पर दवाइयां और पोषण दिया गया, जिससे वे धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहे हैं।

CM भजनलाल ने सफेद शावक का नाम रखा भीम

सीनियर वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट डॉ. अरविंद माथुर ने बताया कि इन शावकों की देखभाल करना और उन्हें बचाना एक बड़ी उपलब्धि है। उन्हें डमी के माध्यम से मां का एहसास करवाया गया, ताकि वे मानसिक रूप से मजबूत बन सकें। अब ये शावक डिस्प्ले एरिया के पास बड़े कराल में शिफ्ट हो चुके हैं। इन शावकों में एक सफेद बाघ शावक है, जिसे मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने ..भीम.. नाम दिया है। वहीं, मादा शावक का नाम ...स्कंदी... रखा गया है।

राधा की कहानी है प्रेरणादाई

पार्क में मादा लेपर्ड शावक राधा की कहानी भी प्रेरणादायक है। उसे राजस्थान के करौली जिले के जंगल से लाया गया था, जब उसकी उम्र सिर्फ 10 से 15 दिन थी और उसका वजन मात्र 1200 ग्राम था। भूख और प्यास के कारण वह कमजोर थी। उसके खास देखभाल के लिए अमेरिका से विशेष दूध पाउडर मंगवाया गया। अब राधा पूरी तरह से स्वस्थ और हष्ट.पुष्ट है और रेस्क्यू सेंटर में खेलती-कूदती नजर आती है। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में इन नन्हे शावकों की जीवंतता और संघर्ष को जानने के लिए बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं।

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