कुएं में बंधी हुई लाशें और दबी हुई सच्चाई! राजस्थान के झालावाड़ में मां और दो मासूम बच्चों की लाशें एक ही कुएं से मिलीं, बच्चों की मां की कमर से बंधी हालत में मौत मिली—ये हादसा था या कोई रची गई साजिश? जांच में चौंकाने वाले राज खुल सकते हैं!

Jhalawar Shocking News: राजस्थान के झालावाड़ जिले के सुनेल थाना क्षेत्र में मंगलवार को एक हिला देने वाली घटना सामने आई। सुनेल कस्बे के दुबलिया गांव में खेत में स्थित एक कुएं से तीन शव बरामद किए गए—एक महिला और उसके दो मासूम बच्चे। घटना के बाद पूरे इलाके में सन्नाटा और मातम का माहौल छा गया।

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कौन थीं मृतका? क्या था उनका पारिवारिक जीवन?

पुलिस के अनुसार, मृत महिला की पहचान 26 वर्षीय रामभरोस बाई के रूप में हुई है, जो झालरापाटन निवासी अनिल गुर्जर की पत्नी थीं। रामभरोस के साथ उसकी 3 वर्षीय बेटी प्राची और 1 वर्षीय बेटा गुरु के शव भी कुएं से बरामद किए गए। सबसे हैरान कर देने वाली बात ये रही कि दोनों बच्चे मां की कमर से रस्सी से बंधे हुए थे।

महिला की तलाश शुरू हुई तब खुला रहस्य

मृतका के भाई दिनेश गुर्जर, निवासी सालरी, ने बताया कि जब बहन और बच्चे दोपहर बाद तक घर नहीं लौटे तो पूरे परिवार को चिंता सताने लगी। ढूंढते-ढूंढते वह खेत तक पहुंचे। वहां कुएं के पास महिला और बच्चों की चप्पलें देखी गईं। इस पर ग्रामीणों को शक हुआ और जब उन्होंने कुएं में झांका तो अंदर तीनों शव नजर आए।

ग्रामीणों और पुलिस ने मिलकर निकाले शव 

घटना की सूचना मिलते ही सुनेल थाना प्रभारी विष्णु सिंह मौके पर पुलिस टीम के साथ पहुंचे। स्थानीय लोगों की मदद से तीनों शवों को बाहर निकाला गया। शवों को मेडिकल बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया ताकि मौत के पीछे के कारणों का स्पष्ट पता लगाया जा सके।

आत्महत्या या साजिश? 

पुलिस ने दर्ज की रिपोर्ट रामभरोस बाई के भाई की शिकायत पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। हालांकि पुलिस अभी तक इस बात को लेकर स्पष्ट नहीं है कि यह मामला आत्महत्या का है या फिर हत्या की कोई सोची-समझी साजिश। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।

कमर से बंधे बच्चे—मां की ममता या मजबूरी? 

बच्चों को मां की कमर से बांधकर कुएं में उतरना एक भावनात्मक और झकझोर देने वाला दृश्य है। यह संकेत करता है कि या तो महिला ने किसी मानसिक तनाव में आकर ऐसा कदम उठाया, या फिर यह किसी योजनाबद्ध हत्या का हिस्सा था, जिसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई हो।

गांव में पसरा मातम 

दुबलिया गांव की गलियों में मातम और खामोशी है। लोग घटना को लेकर स्तब्ध हैं। किसी को भरोसा नहीं हो रहा कि एक मां अपने मासूम बच्चों के साथ इस तरह मौत को गले लगा सकती है।

एक मां, दो मासूम और मौत की पहेली 

इस दर्दनाक घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या रामभरोस बाई घरेलू हिंसा का शिकार थीं? क्या उनके पति या परिवार पर कोई दबाव था? या फिर वह मानसिक रूप से परेशान थीं? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में पुलिस जांच से सामने आ सकते हैं। फिलहाल, पूरा गांव इस दुखद घटना से उबरने की कोशिश कर रहा है और पुलिस हर एंगल से मामले की गहन जांच कर रही है।