रमज़ान के पवित्र महीने में शीरमाल की मांग बढ़ जाती है। मुगलकाल से चली आ रही इस मीठी रोटी की रेसिपी और खासियत जानें।

अजमेर. रमजान के साथ ही आज से रोजे और इबादत का दौर भी शुरू हो गया है। ऐसे में रोजे खोलने के दौरान खाए जाने वाले व्यंजन की डिमांड भी बढ़ गई है। इस मौके पर एक खास डिश सबसे ज्यादा खाई जाती है। अमूमन ये रमजान के महीने में ही तैयार की जाती है, इसलिए इसके लिए सब इंतजार में रहते हैं। सबसे खास बात ये है कि मुस्लिमों के अलावा अन्य समुदाय के लोग भी इसे खासा पसंद करते हैं। जो कि पूरी तरह से वेज है। राजस्थान के सभी शहरों में इसकी सैंकड़ों दुकानें सजाई गई हैं।

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रोजा-रमजान में स्पेशल होता है शीरमाल

हम बात कर रहे हैं शीरमाल की जो कि एक तंदूरी रोटी है और इसे मीठी बनाया जाता है। जो मुंह में रखते ही घुल जाती है। दरअसल आटे और मैदा के मिश्रण से इसे बनाया जाता है। दूध-घी से मिश्रण तैयार करने के बाद इसे तंदूर में पकाया जाता है। उसके बाद इलायची और केसर युक्त चाशनी में डुबोया जाता है। इसके बाद इसे सूखे मेवों में डाला जाता है। जिससे बड़ी मात्रा में इस पर काजू, बादाम और अखरोट चिपक जाती है। मुंह में रखते ही यह घुल जाती है।

 मुगलकाल से चली आ रही है यह डिश

इतिहासकार बताते हैं कि ये यह डिश मुगलकाल से चली आ रही है। रोजे के दौरान इसे खाने से ताकत के साथ ही पोषण भी मिलता है। हर रात बड़ी मात्रा में इसकी खपत होती है। एक शीरमाल यानी मीठी रोटी की कीमत बीस रुपए से लेकर दो सौ रुपए तक भी हो सकती है।