अलवर और चित्तौड़गढ़ में टैंकर हादसे बाल-बाल टले। केमिकल और गैस टैंकरों की सुरक्षा पर सवाल। रिहायशी इलाकों से दूर रूट बनाने की मांग।

जयपुर. हाल के दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में टैंकर हादसों की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिससे न केवल यातायात बाधित हो रहा है बल्कि स्थानीय निवासियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। रविवार को अलवर जिले के दिल्ली-मुंबई सुपर एक्सप्रेस वे पर और चित्तौड़गढ़-उदयपुर हाइवे पर ऐसे ही दो अलग-अलग हादसे हुए, जो बड़े हादसों में तब्दील हो सकते थे।

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एक छोटी सी चिंगारी करने वाली थी धमाका

अलवर जिले के रैणी थाना क्षेत्र में रात को थिनर केमिकल से भरा एक टैंकर पलट गया। इस घटना के दौरान सड़क पर केमिकल फैलने लगा, जो अत्यंत ज्वलनशील था। सूचना मिलने पर पुलिस और हाईवे की टीम ने मौके पर पहुंचकर तुरंत कार्रवाई की। क्रेन और फायर ब्रिगेड की सहायता से टैंकर को हटाया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, स्थानीय लोग इस घटना के बाद काफी भयभीत हो गए, क्योंकि एक छोटी सी चिंगारी भी विनाशकारी साबित हो सकती थी।

चित्तौड़गढ़-उदयपुर हाइवे पर गैस टैंकर का टायर फटा

दूसरी ओर, चित्तौड़गढ़-उदयपुर हाइवे पर सुखवाड़ा के पास एक गैस से भरे टैंकर का टायर फटने से वह डिवाइडर पर चढ़ गया। जोरदार धमाके की आवाज सुनकर पास के होटल संचालक ने स्थिति की सूचना पुलिस और हाईवे पेट्रोलिंग टीम को दी। गनीमत रही कि टैंकर में भरी गैस सुरक्षित रही और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

रसायनों और गैसों से भरे टैंकरों के लिए हो अलग रूट

इन घटनाओं ने एक बार फिर खतरनाक रसायनों और गैसों से भरे टैंकरों के आवागमन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे टैंकरों के लिए निर्धारित रूट होना चाहिए, ताकि ये रिहायशी इलाकों से दूर रहें। इसके साथ ही, इन टैंकरों की नियमित जांच और ड्राइवरों को विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता है।

उल्लेखनीय है कि तीन दिन पहले हुए गैस टैंकर ब्लास्ट का दंश जयपुर अभी तक झेल रहा है। अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है । 20 से ज्यादा लोग बहुत बुरी हालत में जले हुए हैं और जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।