अवैधानिक रूप से बजरी का खनन करने जा रहे एक ट्रैक्टर ने पुलिस कांस्टेबल को टक्कर मार दी थी। जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई है। इस मामले में लोग एकत्रित होकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर कार्रवाई की मांग की।

टोंक. बजरी का अवैध खनन करने जा रहे एक ट्रैक्टर चालक ने लापरवाही पूर्वक वाहन चलाते हुए एक पुलिसवाले को जोरदार टक्कर मार दी, दरअसल पुलिसवाला पूछताछ के लिए ट्रैक्टर को रोक रहा था। उसी दौरान पुलिस कांस्टेबल को ट्रैक्टर से कुचल दिया था। गंभीर रूप घायल कांस्टेबल की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस मामले में आक्रोशित ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। जहां सचिन पायलट मुर्दाबाद के नारे भी लगाए गए हैं।

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सड़क दुर्घटना में मौत

राजस्थान के टोंक जिले में एक पुलिस हैड कांस्टेबल की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई है। यहां बजरी माफियाओं ने पुलिस कांस्टेबल को टक्कर मारी जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया और इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद अब स्थानीय लोगों ने सचिन पायलट के खिलाफ भी अपना गुस्सा जाहिर किया। सैकड़ो लोग बड़ी तादाद में जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और सचिन पायलट, पुलिस और जिला प्रशासन के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे भी लगे लगाए।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो

इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि उन लोगों को वहां मौजूद पुलिसकर्मी समझाते भी है। लेकिन वह लोग पुलिस की एक नहीं सुनते और अपना प्रदर्शन जारी रखते हैं। आपको बता दे कि टोंक में दो दिन पहले कोतवाली थाना क्षेत्र में अवैध बजरी का खनन करके ले जा रहे ट्रैक्टर ने हेड कांस्टेबल खुशीराम को टक्कर मारकर घायल कर दिया था।

एक करोड़ की सहायता राशि और शहीद का दर्जा

इस घटना के बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए। लेकिन इलाज के दौरान मौत हो गई। जिस दौरानी यह नारेबाजी की गई,उस वक्त कांग्रेस के जिलाध्यक्ष हरिप्रसाद भी वहीं मौजूद थे। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि उन्हें एक करोड़ की सहायता राशि दी जाए और पुलिसकर्मी को शहीद का दर्जा मिले।

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सचिन पायलट ने सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

वहीं इस बवाल के बाद सचिन पायलट ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए हेड कांस्टेबल को टक्कर मारने वाले आरोपियों के खिलाफ राज्य सरकार से कार्रवाई की मांग की है। जहां यह घटना हुई वह सचिन पायलट का ही विधानसभा क्षेत्र है। ऐसे में लोगों का उनके प्रति गुस्सा है। यह बजरी माफिया के आतंकी कोई पहली घटना नहीं है। इसके पहले भी टोंक और सवाई माधोपुर में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं।

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