उदयपुर में 22 वर्षीय नर्सिंग छात्र नारायणलाल को गुलियन बैरे सिंड्रोम नामक गंभीर बीमारी हुई। ₹85 लाख का इलाज राजस्थान सरकार की 'मां' योजना के तहत मुफ्त में हुआ, जिससे परिवार को आर्थिक बोझ से राहत मिली।

उदयपुर (राजस्थान). उदयपुर के एमबी हॉस्पिटल में डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ की कड़ी मेहनत और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी मां योजना का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला। पाली जिले के बरकाना गांव के 22 वर्षीय नारायणलाल को मौत के मुंह से बचा लिया गया। उसके इलाज में टोटल 85 लाख रूपए का खर्च आया। लेकिन अच्छी बात यह थी कि इसमें परिवार का एक रुपए भी खर्च नहीं हुआ और बेटा सलामत घर लौट आया। युवक गंभीर हालत में 30 जून 2024 से आईसीयू में भर्ती था।

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जनिए नर्सिंग स्टूडेंट को क्या थी बीमारी

नर्सिंग की पढ़ाई कर रहे नारायण को दुर्लभ बीमारी गुलियन बैरे सिंड्रोम थी, जो एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम खुद पर हमला करना शुरू कर देता है। यह बीमारी व्यक्ति को बोलने, चलने और सामान्य गतिविधियों में अक्षम बना देती है। नारायण की हालत इतनी गंभीर थी कि उसे तुरंत वेंटिलेटर पर रखना पड़ा।

महंगे इंजेक्शन, वेंटिलेटर और दवाइयों का था लाखों खर्च

मरीज के इलाज में 80.85 लाख रुपए का खर्च हुआ, जिसमें महंगे इंजेक्शन, वेंटिलेटर और अन्य दवाइयों का इस्तेमाल किया गया। लेकिन राज्य सरकार की मां योजना के अंतर्गत यह पूरा इलाज निशुल्क हुआ। परिजनों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ा और नारायण का इलाज पूरी निष्ठा के साथ जारी रहा। अस्पताल के स्टाफ और डॉक्टर्स की टीम की मेहनत का ही यह परिणाम रहा। 

 डॉक्टरों ने तो कर दिया कमाल

शुरुआती 20 दिनों तक नारायण के शरीर में कोई हरकत नहीं थी, लेकिन डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने हिम्मत नहीं हारी। धीरे-धीरे नारायण ने रिकवरी करनी शुरू की। सांस लेने में तकलीफ होने पर गले में छेद किया गया और फेफड़ों की समस्या का इलाज भी सफलतापूर्वक किया गया। हाल ही 12 जनवरी 2025 को नारायण के जन्मदिन पर अस्पताल स्टाफ ने आईसीयू में केक काटा और गुब्बारों से सजावट कर जश्न मनाया। उन्होंने नारायण को ...आईसीयू बॉय... का नाम भी दिया।

मां योजना हैं सरकार की बंपर स्कीम

एमबी चिकित्सालय अधीक्षक डॉ आर एल सुमन ने बताया कि नारायण का सम्पूर्ण इलाज मां योजना के तहत निशुल्क हुआ। यह राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजना का अद्भुत उदाहरण है, जिसने एक परिवार को आर्थिक संकट से बचाया और मरीज को नया जीवन दिया।