रामनगरी अयोध्या में आधुनिक कैंसर अस्पताल बनने जा रहा है। नमो फाउंडेशन के नेतृत्व में 6 से 8 एकड़ भूमि पर अस्पताल बनेगा, जहां कम खर्च में इलाज होगा। इसके बाद मरीजों को लखनऊ या दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा।

अब आस्था की नगरी अयोध्या सिर्फ धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि गंभीर बीमारियों के इलाज का भरोसेमंद केंद्र भी बनेगी। वर्षों से कैंसर जैसे रोगों के उपचार के लिए बड़े शहरों की ओर जाने को मजबूर लोगों के लिए यह खबर राहत और उम्मीद दोनों लेकर आई है। रामनगरी में आधुनिक कैंसर अस्पताल के निर्माण की तैयारी शुरू हो चुकी है।

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लखनऊ-दिल्ली नहीं, अब अयोध्या में ही होगा इलाज

नमो फाउंडेशन के नेतृत्व में अयोध्या में अत्याधुनिक कैंसर अस्पताल बनाने का निर्णय लिया गया है। इस परियोजना को लेकर राम मंदिर ट्रस्ट और नमो फाउंडेशन के बीच विस्तृत बैठक हो चुकी है। अस्पताल के शुरू होने के बाद अयोध्या समेत आसपास के जिलों के मरीजों को इलाज के लिए लखनऊ, दिल्ली या मुंबई का रुख नहीं करना पड़ेगा।

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सूर्य कुंड के पास बनेगा बड़ा स्वास्थ्य केंद्र

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह कैंसर अस्पताल करीब 6 से 8 एकड़ भूमि में विकसित किया जाएगा। इसके लिए सूर्य कुंड के आसपास की भूमि पर विचार किया जा रहा है। अस्पताल का नाम राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के नाम पर रखने का निर्णय भी लिया गया है, जिससे स्थानीय इतिहास और जनसेवा दोनों का सम्मान हो सके।

जमीन देने को तैयार अयोध्या के राजा यतींद्र मिश्र

नमो फाउंडेशन ने इस परियोजना के लिए अयोध्या के राजा यतींद्र मिश्र से संपर्क किया है। उन्होंने कैंसर अस्पताल के निर्माण हेतु 6 से 8 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। बताया जा रहा है कि वे इस परियोजना को लेकर स्वयं भी काफी उत्साहित हैं और इसे अयोध्या के लिए ऐतिहासिक पहल मानते हैं।

रतन टाटा की सोच से निकली जनकल्याण की पहल

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि यह परियोजना दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा की सोच से प्रेरित है। रतन टाटा का सपना था कि देश के अलग-अलग हिस्सों में कैंसर की जांच और इलाज की बेहतर सुविधाएं हों, ताकि मरीजों को इलाज के लिए महानगरों पर निर्भर न रहना पड़े।

इलाज के साथ सेवा, कम खर्च में बड़ी राहत

नृपेंद्र मिश्रा ने स्पष्ट किया कि इस अस्पताल का उद्देश्य सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं रहेगा। यहां जनसेवा को भी प्राथमिकता दी जाएगी। कोशिश होगी कि कैंसर का उपचार अधिक खर्चीला न हो, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग भी यहां आसानी से इलाज करा सकें।

24 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य

कैंसर अस्पताल के निर्माण को लेकर समयसीमा भी तय की गई है। योजना के अनुसार इस परियोजना को करीब 24 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद अस्पताल को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा।

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