दिल्ली धमाकों की जांच में एनआईए ने कश्मीर से लखनऊ तक आठ ठिकानों पर छापेमारी की। लखनऊ के खंदारी बाजार में डॉ. शाहीन शाहिद के परिजनों से पूछताछ हुई। एजेंसी व्हाइट-कॉलर आतंकी मॉड्यूल के नेटवर्क और फंडिंग की जांच कर रही है।

दिल्ली धमाकों की गुत्थी सुलझाने में जुटी एनआईए अब तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। सोमवार की सुबह जैसे-जैसे जांच की परतें खुलनी शुरू हुईं, वैसे-वैसे एजेंसी की टीमें कश्मीर से लेकर लखनऊ तक एक-साथ सक्रिय दिखीं। राजधानी लखनऊ में तो हलचल उस समय बढ़ गई जब एनआईए की टीम खंदारी बाजार स्थित डॉ. शाहीन शाहिद के पिता के घर जांच के लिए पहुंची। स्थानीय पुलिस की मौजूदगी ने पूरे इलाके को थोड़ी देर के लिए सुरक्षा घेरे में बदल दिया।

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लखनऊ में पूछताछ, परिवार से जुटाए इनपुट

एनआईए की टीम ने लखनऊ में डॉ. शाहीन शाहिद के परिजनों से पूछताछ की। बताया जा रहा है कि दिल्ली धमाकों से जुड़े कुछ अहम सुराग मिलने के बाद जांच एजेंसी ने उनकी भूमिका और संपर्कों को समझने के लिए यह कार्रवाई की। घर के आसपास लोगों की भीड़ जुट गई और माहौल में तनाव साफ महसूस हुआ। हालांकि, अभी इस छापेमारी से जुड़े किसी ठोस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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सहारनपुर में भी दबिश, डॉ. अदील अहमद राथर के घर तलाशी

यूपी में एनआईए की एक अन्य टीम ने सहारनपुर में छापेमारी की। नवंबर के पहले सप्ताह में गिरफ्तार किए गए डॉ. अदील अहमद राथर के आवास पर भी व्यापक तलाशी ली गई। एजेंसी को शक है कि दिल्ली धमाकों से जुड़े आर्थिक और तकनीकी नेटवर्क की कई कड़ियां इन ठिकानों तक पहुंच सकती हैं।

'व्हाइट-कॉलर' आतंकी मॉड्यूल की खोज में जुटी एनआईए

इन सभी छापों का मुख्य उद्देश्य एक खास प्रकार के मॉड्यूल का पर्दाफाश करना है जिसे व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल कहा जाता है। यह मॉड्यूल पारंपरिक हथियारों या हिंसा के रास्ते नहीं चलता, बल्कि:

  • वित्तीय धोखाधड़ी
  • मनी लॉन्ड्रिंग
  • फर्जी लेन-देन
  • डिजिटल ट्रांजैक्शनों के दुरुपयोग, जैसे तरीकों से आतंक को फंडिंग करता है।

ये नेटवर्क आमतौर पर शिक्षित, तकनीकी रूप से दक्ष व्यक्तियों द्वारा चलाए जाते हैं, जिससे इन्हें पहचानना और खत्म करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बेहद कठिन हो जाता है।

कई ठिकानों पर कार्रवाई से मिले नए सुराग

कश्मीर, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में हुई छापेमारी के बाद एनआईए ने कई डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज़ और संदिग्ध लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड कब्जे में लिए हैं। जांच टीम अब इनकी फोरेंसिक और तकनीकी जांच कर रही है। फिलहाल एजेंसी ने इसे दिल्ली धमाका केस की जांच में एक महत्वपूर्ण प्रगति बताया है।

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