इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जीजा-साली के रिश्ते पर एक अहम फैसला सुनाया है। बालिग साली की सहमति से बने संबंध को बलात्कार नहीं माना जाएगा, भले ही रिश्ता सामाजिक रूप से गलत हो।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जीजा-साली के बीच संबंधों को लेकर अहम और विवादास्पद फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि जीजा-साली का रिश्ता अनैतिक हो सकता है, लेकिन यदि महिला बालिग है और दोनों के बीच संबंध सहमति से बने हैं तो इसे बलात्कार नहीं माना जा सकता। यह टिप्पणी जस्टिस समीर जैन की पीठ ने उस मामले में की, जिसमें आरोप था कि आरोपी जीजा ने अपनी साली को शादी का झांसा देकर बहलाकर भागा लिया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।

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क्या है मामला?

यह मामला तब सामने आया जब साली के परिवार को दोनों के रिश्ते के बारे में जानकारी हुई। आरोप था कि जीजा ने अपनी साली को झूठे वादे के तहत शादी के लिए बहला-फुसलाकर भगाया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। साली ने पहले अपने बयान में इन आरोपों से इनकार किया था, लेकिन बाद में उसने धारा 164 सीआरपीसी के तहत अपना बयान बदलते हुए आरोपी के साथ संबंध होने की बात स्वीकार की।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम निर्णय

कोर्ट ने इस मामले में आरोपी जीजा को जमानत देते हुए यह टिप्पणी की कि यदि महिला बालिग है और इस रिश्ते में उसकी सहमति थी, तो इसे बलात्कार के अपराध के तहत नहीं माना जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने माना कि इस रिश्ते को सामाजिक और नैतिक दृष्टिकोण से गलत माना जा सकता है। जस्टिस समीर जैन ने यह भी कहा कि महिला की बालिग होने और इस संबंध में सहमति से शामिल होने के कारण आरोपी पर बलात्कार का आरोप नहीं बनता।

आरोपी के खिलाफ धारा 366, 376 और 506 आईपीसी के तहत मामला दर्ज किया गया था, लेकिन कोर्ट ने आरोपी की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि न होने और जुलाई 2024 से हिरासत में होने के कारण उसे जमानत दे दी।

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