पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, जलमार्ग और औद्योगिक कॉरिडोर के विस्तार से प्रदेश तेजी से देश के उभरते लॉजिस्टिक्स और निवेश हब के रूप में आगे बढ़ रहा है।

कभी खराब सड़कों और कमजोर कनेक्टिविटी के लिए चर्चा में रहने वाला उत्तर प्रदेश अब तेजी से बदलती तस्वीर पेश कर रहा है। पिछले करीब 9 वर्षों में प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बड़ा विस्तार हुआ है। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, जलमार्ग और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी जैसी परियोजनाओं ने न सिर्फ यात्रा को आसान बनाया है, बल्कि निवेश और रोजगार के नए रास्ते भी खोले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत बुनियादी ढांचा किसी भी राज्य की आर्थिक प्रगति की रीढ़ होता है। इसी दिशा में उत्तर प्रदेश ने बीते वर्षों में कई बड़े कदम उठाए हैं, जिससे अब प्रदेश देश के उभरते लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक हब के रूप में देखा जा रहा है।

2017 से पहले कैसी थी स्थिति

वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर का दायरा सीमित था। उस समय प्रदेश में सिर्फ दो एक्सप्रेसवे संचालित थे और कई इलाकों में कनेक्टिविटी कमजोर थी। उद्योगों के लिए बड़े पैमाने पर औद्योगिक कॉरिडोर या योजनाबद्ध भूमि विकास की गति भी धीमी थी। लॉजिस्टिक्स लागत ज्यादा होने के कारण उद्योगों को माल ढुलाई में समय और पैसा दोनों ज्यादा खर्च करना पड़ता था। एविएशन सेक्टर में भी सीमित विस्तार था और राज्य बड़े निवेश गंतव्य के रूप में ज्यादा आकर्षक नहीं माना जाता था। जलमार्ग और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी की दिशा में भी उस समय कोई बड़ा ढांचा विकसित नहीं हुआ था।

9 वर्षों में तेजी से बदली तस्वीर

पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में तेज बदलाव देखने को मिला है। जहां 2017 में सिर्फ 2 एक्सप्रेसवे थे, वहीं अब प्रदेश में कुल 22 एक्सप्रेसवे की योजना बन चुकी है। इनमें 7 एक्सप्रेसवे चालू हैं, 5 निर्माणाधीन हैं और 10 प्रस्तावित हैं। आज देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। इससे प्रदेश के कई जिलों के बीच यात्रा का समय काफी कम हुआ है और माल परिवहन भी आसान हुआ है।

एक्सप्रेसवे के किनारे बन रहे औद्योगिक क्षेत्र

इन एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए 26 जिलों के 27 स्थानों पर करीब 5,300 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है। यहां भविष्य में औद्योगिक इकाइयों और लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित किए जाएंगे। इसी क्रम में बुंदेलखंड क्षेत्र में बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) का गठन किया गया है। करीब 47 वर्षों बाद यहां एक नए औद्योगिक शहर की नींव रखी गई है, जिससे लगभग 56,662 एकड़ क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं खुली हैं।

निर्यात और निवेश में भी सुधार

इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार का असर निर्यात के क्षेत्र में भी दिखाई दे रहा है। ‘एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स 2024’ में उत्तर प्रदेश चौथे स्थान पर पहुंच गया है, जबकि 2022 में यह सातवें स्थान पर था। लैंडलॉक्ड राज्यों में प्रदेश पहले स्थान पर है। लॉजिस्टिक्स सेक्टर में सुधार के कारण माल ढुलाई का समय कम हुआ है और लागत भी घटी है। इससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ी है और निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।

जल, थल और नभ तीनों में कनेक्टिविटी

प्रदेश में सिर्फ सड़क ही नहीं, बल्कि जल और हवाई कनेक्टिविटी को भी मजबूत किया गया है। वाराणसी में देश का पहला मल्टी-मॉडल टर्मिनल बनाया गया है, जहां सड़क, रेल और जलमार्ग तीनों को जोड़ा गया है। इसके अलावा रामनगर, चंदौली, मीरजापुर और गाजीपुर में टर्मिनल और फ्रेट विलेज विकसित किए जा रहे हैं, जिससे माल परिवहन को और आसान बनाया जा सके। सड़क निर्माण के क्षेत्र में भी तेजी आई है। औसतन करीब 19 किलोमीटर प्रतिदिन के हिसाब से सड़कों का निर्माण, चौड़ीकरण और सुधार का काम किया जा रहा है।

एविएशन सेक्टर में भी प्रदेश ने बड़ा विस्तार देखा है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 16 हवाई अड्डे संचालित हैं, जिनमें 4 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे शामिल हैं। इसके अलावा 8 नए हवाई अड्डों पर काम जारी है। आने वाले समय में नोएडा के पास बन रहा जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन जाएगा, जहां 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर किसी भी राज्य के विकास का आधार होता है। उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार, मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और औद्योगिक कॉरिडोर के विकास से लॉजिस्टिक्स लागत और कम होगी।

इससे प्रदेश में निवेश बढ़ेगा, उद्योगों को गति मिलेगी और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी बनेंगे। यही बुनियादी ढांचा आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश को देश की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत इंजन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।