उत्तर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में 40% की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रदेश अब देश में सबसे बड़ा दूध उत्पादक बन गया है। महिलाओं की भागीदारी और सरकारी योजनाओं से डेयरी सेक्टर को मजबूती मिली है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया बल मिला है।

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में पहले की तुलना में करीब 40 प्रतिशत तक दूध उत्पादन बढ़ा है। इतना ही नहीं, उत्तर प्रदेश ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे बड़े दुग्ध उत्पादक राज्यों को पीछे छोड़ते हुए देश में अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

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देश के कुल दुग्ध उत्पादन में यूपी की मजबूत हिस्सेदारी

देश के कुल दुग्ध उत्पादन में शीर्ष पांच राज्यों की हिस्सेदारी लगभग 54 प्रतिशत है, जिसमें अकेले उत्तर प्रदेश का योगदान करीब 16 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा प्रदेश की मजबूत डेयरी व्यवस्था और लगातार बढ़ती उत्पादन क्षमता को दर्शाता है।

उत्पादन में तेज उछाल: 277 से 388 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा आंकड़ा

प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में लगातार वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2016-17 में जहां दूध उत्पादन 277 लाख मीट्रिक टन था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 388 लाख मीट्रिक टन से अधिक हो गया है। यह वृद्धि योजनाबद्ध विकास और बेहतर नीतियों का परिणाम मानी जा रही है।

योजनाबद्ध विकास और सरकार के प्रयासों का असर

पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि करीब 40 प्रतिशत की यह वृद्धि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में किए गए ठोस और जमीनी स्तर के प्रयासों का परिणाम है। सरकार की योजनाओं और डेयरी सेक्टर में सुधारों ने इस क्षेत्र को नई दिशा दी है।

ग्रामीण महिलाएं बनीं दुग्ध क्रांति की सबसे बड़ी ताकत

इस दुग्ध क्रांति में ग्रामीण महिलाओं की भूमिका सबसे अहम रही है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत लाखों महिलाएं डेयरी गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। प्रदेश के 31 जिलों में महिला स्वयं सहायता समूह रोजाना करीब 10 लाख लीटर दूध का संग्रहण कर रहे हैं और अब तक लगभग 5000 करोड़ रुपये का कारोबार कर चुके हैं।

महिला डेयरी कंपनियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली मजबूती

प्रदेश में पांच प्रमुख दुग्ध उत्पादक कंपनियों के माध्यम से करीब चार लाख महिला किसान जुड़ी हुई हैं। फरवरी 2026 तक इन कंपनियों का कुल कारोबार 5000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। इन प्रमुख कंपनियों में शामिल हैं:

  • बुंदेलखंड: बलिनी एमपीसीएल
  • पूर्वांचल: काशी एमपीसीएल
  • अवध: सामर्थ्य एमपीसीएल
  • गोरखपुर मंडल: श्री बाबा गोरखनाथ कृपा एमपीसीएल
  • तराई क्षेत्र: सृजन एमपीसीएल

उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर और महिलाओं का सशक्तिकरण

पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने कहा कि योगी सरकार के कार्यकाल में पहली बार महिलाओं को बड़े स्तर पर आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ा गया है। दुग्ध उत्पादन में यह रिकॉर्ड वृद्धि न केवल आर्थिक मजबूती का संकेत है, बल्कि प्रदेश में हो रहे सकारात्मक बदलाव और महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रतीक भी है।