लखनऊ के ऐशबाग में बन रहा डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक जुलाई 2026 तक तैयार होगा। योगी सरकार द्वारा विकसित इस परियोजना में संग्रहालय, शोध केंद्र, ऑडिटोरियम, पुस्तकालय और बाबा साहेब की 25 फीट प्रतिमा शामिल होगी।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र तेजी से आकार ले रहा है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व में बन रहा यह स्मारक केवल एक इमारत नहीं बल्कि सामाजिक न्याय, संविधान और बाबा साहेब के विचारों को समर्पित एक महत्वपूर्ण केंद्र होगा। लखनऊ के ऐशबाग क्षेत्र में निर्माणाधीन यह परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और इसका निर्माण कार्य जुलाई 2026 तक पूरा होने की संभावना है।

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ऐशबाग में बन रहा है भव्य डॉ. आंबेडकर स्मारक

यह स्मारक लखनऊ के ऐशबाग इलाके में ईदगाह के सामने लगभग 2.5 एकड़ भूमि पर बनाया जा रहा है। शुरुआत में इसकी अनुमानित लागत 45.04 करोड़ रुपए तय की गई थी, लेकिन बाद में ऑडिटोरियम, फिनिशिंग और बाहरी विकास कार्य जुड़ने के कारण इसकी लागत बढ़कर करीब 81 करोड़ से 100 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है।

परियोजना के लिए दो चरणों में भूमि आवंटन और बजट जारी किया गया। वर्तमान में निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, जबकि 500 सीटों वाले आधुनिक ऑडिटोरियम का काम अंतिम चरण में है। इस परियोजना का शिलान्यास 29 जून 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति Ram Nath Kovind ने किया था। लंबे समय से आंबेडकर महासभा और बाबा साहेब के अनुयायी इस स्मारक की मांग कर रहे थे।

सविता आंबेडकर की इच्छा को मिला आकार

आंबेडकर महासभा ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने बताया कि इस स्मारक की प्रेरणा बाबा साहेब की पत्नी डॉ. सविता आंबेडकर की इच्छा से जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1991 में डॉ. सविता आंबेडकर ने आंबेडकर महासभा में डॉ. आंबेडकर के अस्थि अवशेष स्थापित किए थे। उस दौरान उन्होंने इच्छा जताई थी कि बाबा साहेब के अस्थि अवशेषों पर एक भव्य स्मारक बनाया जाए, जिसमें पुस्तकालय और संग्रहालय भी शामिल हों। डॉ. निर्मल के अनुसार, कई वर्षों तक विभिन्न सरकारों से इस मांग को रखा गया, लेकिन इसे वास्तविक रूप देने का फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया।

सीएम योगी ने परियोजना को दी प्राथमिकता

डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस परियोजना को मंजूरी देने के साथ-साथ इसके निर्माण को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने माई साहेब सविता आंबेडकर के सपनों को साकार किया है। इसके लिए आंबेडकर महासभा योगी सरकार के प्रति आभार व्यक्त करती है।

स्मारक में होगी 25 फीट ऊंची डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा

स्मारक परिसर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की 25 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसके अलावा यहां तीन मंजिला प्रशासनिक भवन, आधुनिक संग्रहालय और फोटो गैलरी भी बनाई जा रही है। यह संग्रहालय बाबा साहेब के जीवन, संघर्ष और संविधान निर्माण में उनके योगदान को प्रदर्शित करेगा।

इसके साथ ही विशाल पुस्तकालय और शोध केंद्र का निर्माण भी किया जा रहा है। यहां आंबेडकर विश्वविद्यालय के सहयोग से पीएचडी स्तर तक शोध की सुविधा उपलब्ध होगी। शोधार्थियों के लिए हॉस्टल और भोजन की व्यवस्था भी परिसर में ही रहेगी।

डिजिटल तकनीक से नई पीढ़ी तक पहुंचेंगे बाबा साहेब के विचार

योगी सरकार इस स्मारक को तकनीकी रूप से भी आधुनिक बना रही है। यहां ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति, वर्चुअल रियलिटी शो और डिजिटल माध्यमों के जरिए बाबा साहेब के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। आंबेडकर महासभा में सुरक्षित रखे गए डॉ. आंबेडकर के अस्थि कलश को भी यहां पूरे सम्मान के साथ स्थापित किया जाएगा।

इसके अलावा परिसर में विपश्यना ध्यान केंद्र भी बनाया जा रहा है, जिससे यह स्थान सामाजिक चेतना और आध्यात्मिक शांति का केंद्र बन सके। स्मारक परिसर में बेसमेंट, सबस्टेशन, पंप रूम, आंतरिक सड़कें, ड्रेनेज सिस्टम, लैंडस्केपिंग, बाउंड्री वॉल और आकर्षक प्रवेश द्वार का भी विकास किया जा रहा है।

अखिलेश यादव पर लगाए वादाखिलाफी के आरोप

डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने स्मारक निर्माण के संघर्ष का जिक्र करते हुए बताया कि 22 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री Narendra Modi लखनऊ स्थित आंबेडकर महासभा में बाबा साहेब के अस्थि कलश के दर्शन के लिए आने वाले थे। उन्होंने बताया कि इससे दो दिन पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav ने मुख्यमंत्री आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीजी सिटी लखनऊ में स्मारक निर्माण के लिए पांच एकड़ भूमि देने की घोषणा की थी।

डॉ. निर्मल के मुताबिक, जमीन आवंटन के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण ने आवास विकास विभाग को प्रस्ताव भी भेजा था, लेकिन बाद में यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और संबंधित पत्रावली भी गायब हो गई। उन्होंने बताया कि 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद फिर से स्मारक निर्माण की मांग उठाई गई, जिसे मुख्यमंत्री ने स्वीकार कर लिया।