योगी सरकार ने पीएम-जय योजना के तहत अस्पतालों और डॉक्टरों के डाटा सत्यापन के लिए विशेष अभियान चलाया है। फर्जीवाड़ा रोकने, पारदर्शिता बढ़ाने और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड प्रणाली को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

लखनऊ। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और तकनीक आधारित बनाने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी दिशा में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जय) के तहत अस्पतालों और चिकित्सकों के डाटा को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने के लिए विशेष सत्यापन और सैनेटाइजेशन अभियान चलाया गया। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना के लाभार्थियों को सुरक्षित, पारदर्शी और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें और किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़े पर रोक लगाई जा सके।

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अस्पतालों और डॉक्टरों के डाटा की हुई गहन जांच

साचीज की सीईओ Archana Verma ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता है कि गरीब और जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग की ओर से तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कई सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। हाल ही में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान अस्पतालों और चिकित्सकों से जुड़े डाटा का विस्तृत परीक्षण किया गया। जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। समीक्षा के दौरान पाया गया कि 28 चिकित्सकों के नाम 15 से अधिक अस्पतालों से जुड़े हुए थे, जबकि 274 डॉक्टरों के नाम सात से अधिक अस्पतालों में दर्ज पाए गए।

सत्यापन प्रक्रिया के बाद अस्पतालों और डॉक्टरों को नोटिस जारी

इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित चिकित्सकों और अस्पतालों को नोटिस जारी किए गए। इसके बाद तीन दिवसीय सत्यापन प्रक्रिया चलाई गई, जिसमें सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने और जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई डॉक्टर पहले संबंधित अस्पतालों में कार्यरत थे, लेकिन समय पर डाटा अपडेट नहीं होने के कारण उनके नाम रिकॉर्ड में बने हुए थे।

दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बनी राहत

सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि कई विशेषज्ञ चिकित्सक वास्तव में अलग-अलग अस्पतालों से जुड़े हुए हैं और अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इससे प्रदेश के दूरदराज और जरूरतमंद क्षेत्रों में भी विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो पा रही हैं। सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य किसी चिकित्सक या अस्पताल को परेशान करना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को मजबूत करना है।

फर्जीवाड़ा और डाटा विसंगति रोकना सरकार की प्राथमिकता

योगी सरकार पीएम-जय योजना के तहत किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े, डाटा विसंगति और अनियमितताओं को रोकने पर विशेष जोर दे रही है। सरकार चाहती है कि सरकारी संसाधनों का सही उपयोग हो और योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचे। इसके लिए तकनीक आधारित निगरानी और डिजिटल सिस्टम को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड पर जोर

सरकार अब आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत डिजिटल प्रक्रियाओं और इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (ईएचआर) प्रणाली को तेजी से लागू करने पर काम कर रही है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद मरीजों का पूरा चिकित्सा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा। इससे इलाज की प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ईएचआर सिस्टम लागू होने से मरीजों को बार-बार जांच कराने की जरूरत कम होगी। साथ ही डॉक्टरों को इलाज में सुविधा मिलेगी और सरकारी निगरानी तंत्र भी ज्यादा मजबूत हो सकेगा।