राजस्थान में जोधपुर-पाली हाइवे पर एक अनोखा मंदिर है, जहां किसी देवता की नहीं बल्कि, बुलेट बाइक की पूजा होती है। यह संभवत: दुनिया का पहला ऐसा मंदिर है, जहां बुलेट बाइक की पूजा होती है। मंदिर का नाम बुलेट बाबा मंदिर है, जिसे ओम बन्ना मंदिर भी कहते हैं। 

जोधपुर। आस्था और श्रद्धा कब, किस पर बन जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता है। राजस्थान का ऐसा ही एक मामला है, जिसमें लोग किसी देवता की नहीं बल्कि, बुलेट बाइक की पूजा करते हैं। इसीलिए इस अनोखे मंदिर को बुलेट बाबा का मंदिर भी कहते हैं। वहीं, इस मंदिर को ओम बन्ना मंदिर नाम से भी पुकारते और जानते हैं। दावा किया जाता है कि दुनियाभर में यह पहला और अंतिम ऐसा मंदिर है, जहां बाइक वो भी बुलेट की पूजा की जाती है। पाली-जोधपुर हाइवे पर स्थित इस मंदिर में चढ़ावा चढ़ाने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। अच्छी बात ये है कि उसके बाद से यहां दुर्घटना नहीं हुई। 

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दरअसल, इसकी बड़ी दिलचस्प वजह है। बात करीब 34 साल साल पुरानी है, जब 23 दिसंबर 1988 को ओम सिंह राठौर नाम का युवक अपनी बुलेट बाइक से ससुराल जा रहे थे। उनकी ससुराल चोटिला गांव में थी। मगर वहां पहुंचने से पहले उनकी बाइक पेड़ से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। टक्कर इतनी जोरदार दी थी ओम सिंह राठौर की मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना की सूचना मिलने पर पुलिस वहां पहुंची और बाइक को अपने साथ थाने ले गई। 

बाइक की पेड़ से हुई टक्कर में ओम सिंह राठौर की मौत हो गई थी 
पुलिसकर्मियों ने बहुत खोजबीन की, मगर बाइक वहां नहीं मिली। तभी उन्हें किसी ने बताया कि एक बुलेट बाइक कुछ दूरी पर सड़क किनारे खड़ी है। पुलिसकर्मी वहां पहुंचे तो नजारा देखकर हैरान रह गए। दरअसल, ये वही जगह थी, जहां एक दिन पहले ओम सिंह राठौर की इसी बुलेट बाइक के पेड़ की टक्कर की वजह से मौत हो गई थी। पुलिसकर्मी इस बात से हैरान थे कि बाइक खुद चलकर वहां कैसे पहुंच गई। इसके बाद पुलिसकर्मी बुलेट बाइक को एक बार फिर थाने पर ले गए। मगर अगले दिन फिर वही हुआ, जो एक दिन पहले हुआ था। 

थाने पर खड़ी बाइक अगले दिन दुर्घटनास्थल पर पहुंच जाती 
थाने से बाइक एक बार फिर गायब हो चुकी थी। इस बार पुलिसकर्मी सीधे मौके पर पहुंचे तो बाइक वहीं खड़ी मिली। ऐसा एक दो या तीन बार नहीं बल्कि, बार-बार होता रहा। पुलिसकर्मी बाइक को थाने पहुंचाते और बाइक वापस वहीं पहुंच जाती। बाइक को चेन से बांधकर उसकी निगरानी की जाने लगी। मगर पुलिसकर्मी तब हैरान रह गए, जब अपने से टूट गए और बाइक स्टार्ट हुई तथा फिर दुर्घटनास्थल पर जाकर खड़ी हो गई। अब पुलिसकर्मियों ने अपनी जिद छोड़ दी और बाइक को वहीं स्थापित कर दिया और स्थानीय लोग उसकी पूजा करने लगे। बाद में यहां मंदिर बना और इसे ओम बन्ना या बुलेट बाबा मंदिर कहा जाने लगा। 

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