संतकबीर नगर की धनघटा सीट पर नवनिर्वाचित भाजपा विधायक गणेश चंद्र चौहान सफाईकर्मी को टिकट दिया गया था। 2022 विधानसभा चुनाव में जीतकर उन्होंने सपा के अलगू प्रसाद को 10 हजार वोटों से हराकर जीत दर्ज की। नतीजों के बाद गणेश चौहान ने पार्टी का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि मुझे टिकट देकर बीजेपी ने संकेत दिया है कि बेहद साधारण व्यक्ति भी सत्ता के शीर्ष तक पहुंच सकता है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के संतकबीर नगर की धनघटा सीट पर नवनिर्वाचित भाजपा विधायक गणेश चंद्र चौहान सफाईकर्मी को टिकट दिया गया था। 2022 विधानसभा चुनाव में जीतकर उन्होंने सपा के अलगू प्रसाद को 10 हजार से अधिक वोटों से हराकर जीत दर्ज की। नतीजों के बाद गणेश चौहान ने पार्टी का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि मुझे टिकट देकर बीजेपी ने संकेत दिया है कि बेहद साधारण व्यक्ति भी सत्ता के शीर्ष तक पहुंच सकता है।

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आम आदमी भी बड़ी ऊंचाईयों को है छू सकता
उनका कहना है कि भाजपा और लोगों ने संदेश दे दिया कि एक आम कर्मचारी भी बड़ी ऊंचाइयां छू सकता है। यह सिर्फ भाजपा में संभव है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रयागराज में सफाई कर्मियों के पैर धोए और संदेश दिया कि सफाईकर्मी किसी से कम नहीं हो सकते। अगर वे समाज की गंदगी साफ कर रहे हैं तो यह दिखाता है कि वे निश्चित तौर पर महान हैं। हम सबको संदेश दिया कि सफाई करने वाले अब समाज के निचले तबके में नहीं बल्कि सबके साथ रहेंगे। उन्होंने कहा कि पीएम ने कहा था कि समाज की गंदगी साफ करने वाले लोग महान होते हैं। चौहान ने बताया कि उनकी जीत से इलाके का गरीब तबका भावुक हो गया था। 

कोरोनाकाल में नहीं था कमाई का कोई जरिया
गणेश चौहान आगे कहते है कि कोरोना काल के दौरान मैं अपनी गाड़ी में रिक्शे वालों के लिए पूड़ी-सब्जी लेकर चला करते थे, क्योंकि उस दौरान इन लोगों के पास कमाई का कोई जरिया नहीं रह गया था। उन्होंने बताया कि संत कबीर नगर में बड़े पैमाने पर बिहार के लोग वास करते हैं, जब भारतीय जनता पार्टी ने मुझे टिकट दिया तो यहां के लोग भावुक हो गए और जब मैं जीता तो इन्हीं लोगों ने मुझे गले लगा लिया। 

सियासत तक का सफर है बेहद दिलचस्प
गणेश चौहान का राजनीति में आने का सफर बेहद दिलचस्प रहा, पिता राजमिस्त्री का काम करते थे। चौहान ने ग्रैजुएशन तक की पढ़ाई की और कमाई के लिए मजदूरी के काम में जुट गए। इस दौरान वह RSS के साथ जुड़े हुए थे। 2009 में आई सफाई कर्मी की वैकेंसी में उनकी नियुक्ति हो गई, अपने वर्ग में पढ़े लिखे और तेज तर्रार होने के चलते 2009 में ही वह सफाई कर्मचारी संघ के ब्लॉक अध्यक्ष बन गए। यहां से उन्होंने राजनीति में अपना रास्ता बनाने की ठान ली।

साल 2010 में गणेश चौहान ने अपने पिता को जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़वाया, यह वो तीसरे नंबर पर आए लेकिन गणेश ने हार नहीं मानी, 2014 में वह सफाई कर्मचारी संघ के ब्लॉक अध्यक्ष बन गए। गणेश ने 2017 में भी बीजेपी से विधानसभा चुनावों में टिकट की मांग कर रहे थे लेकिन उस बार नहीं मिला, 2021 में उन्होंने अपनी पत्नी को ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़वाया लेकिन सिर्फ 3 वोट से हार गए। 2022 के विधानसभा चुनावों में टिकट मिलने के बाद उन्होंने सफाई कर्मचारी पद से इस्तीफा दे दिया और चुनाव में शानदार जीत दर्ज की। 

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