सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों की लापरवाही पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सख्त होते नजर आ रहे है। शासकीय कार्यालयों में अफसरों और कर्मचारियों की लेटलतीफी के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिए है कि सतत रूप से औचक निरीक्षण किया जाए। 

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार माफियाओं पर ही सख्त नही बल्कि शासकीय कार्यालयों में कर्मचारी और अधिकारियों पर भी पूरी तरह से सख्त नजर आ रही है। सरकारी कर्मचारी ऐसी लापरवाही अक्सर करते हुए पाए जाते है। जिसकी वजह से योगी सरकार 2.0 को सख्ती से पालन कराने का निर्णय लिया है। सीएम योगी ने अधिकारियों और कर्मचारियों के शासकीय कार्यालयों में समय पर न पहुंचने पर सख्त नजर आए। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए है कि इसपर सतत रूप से औचक निरीक्षण किया जाए। 

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वरिष्ठ अधिकारी करें औचक निरीक्षण
उससे पहले मुख्यमंत्री कार्यालय में लंच के टाइम को लेकर मिली शिकायत पर निर्देश जारी किए तो वहीं अब शासकीय कार्यालयों में अफसरों और कर्मचारियों की लेटलतीफी के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि शासकीय कार्यालयों में सभी अधिकारी और कर्मचारी की समय से उपस्थिति होनी सुनिश्चित की जाए। सरकारी कार्यालय में लेटलतीफी कतई स्वीकार नहीं की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सतत औचक निरीक्षण किया जाए। अधिकारियों और अफसरों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए। 

नियमविरुद्ध संचालित कॉलेजों पर हो कार्रवाई
इस बैठक में सीएम योगी आदित्यनाथ ने नियमविरुद्ध संचालित अथवा अधोमानक नर्सिंग कॉलेजों को चिन्हित कर इनके संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कठोरतम कार्रवाई की निर्देश दिए है। इसी के साथ उन्होंने बिना मान्यता के संचालित हो रहे कॉलेजों के खिलाफ भी एक्शन को लेकर निर्देशित किया है। सीएम योगी ने कहा है कि ऐसे कॉलेज युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे में इनके खिलाफ मिल रही जानकारी और शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और उन पर कार्रवाई भी की जाए। 

शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए
कई जगहों से बिना मान्यता के संचालित हो रहे कॉलेजों में युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। सीएम योगी के निर्देश है कि इन कॉलेजों को चिन्हित कर जो भी शिकायतें इससे संबंधित की जा रही हैं। उन्हें गंभीरता से लिया जाए। इसी के साथ उन शिकायतों पर कार्रवाई भी की जाए। जिससे छात्राओं के भविष्य को बचाया जा सके। 

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