ठंड के मौसम में निमोनिया का खतरा ज्यादा, डॉक्टर ने बताए इसके लक्षण और बचने का तरीका

वीडियो डेस्क। ठंड के मौसम में निमोनिया होने का खतरा ज्यादा होता है।  निमोनिया फेफड़ों में होने वाला संक्रमण है। यह मुख्य रूप से विषाणु या जीवाणु के संक्रमण के कारण होता है। यह बैक्टीरिया, वायरस अथवा पेरासाइट्स के कारण भी हो सकता है। इसके अलावा निमोनिया सूक्ष्म जीव, कुछ दवाओं, और अन्य रोगों के संक्रमण से भी हो सकता है। हमारे शरीर में सांस लेने के अंग होते हैं फेफड़े, फेफड़े स्पंज जैसे अंग होते हैं जिनमें ऑक्सीजन तथा कार्बन डाई आक्साईड का आदान प्रदान होता है। फेफड़ों का अधिकतर भाग छोटे-छोटे गुब्बारेनुमा झिल्लियों का बना रहता है । इससे फेफड़े का वो हिस्सा गैस के स्थानांतरण के लायक नहीं रहता। इसके अलावा फेफड़ों की ब्लड-स्पलाई बहुत अधिक होती है। इन किटाणुओं का रक्त के द्वारा शरीर के बाकी हिस्सो में संचार बहुत तेजी से होता है और शरीर बैक्टीरिमिया या स्पटीसिमिया में चला जाता है ये स्थिति बहुत घातक होती है जिससे थोड़ी ही देर में मृत्यु हो सकती है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सिटी हॉस्पिटल की डॉक्टर अंजु गुप्ता ने बताया कि आखिर ये क्यों होता है और बच्चों में इसके होने के लक्षण को कैसें पहचाने। 

/ Updated: Dec 06 2020, 01:23 PM IST

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वीडियो डेस्क। ठंड के मौसम में निमोनिया होने का खतरा ज्यादा होता है।  निमोनिया फेफड़ों में होने वाला संक्रमण है। यह मुख्य रूप से विषाणु या जीवाणु के संक्रमण के कारण होता है। यह बैक्टीरिया, वायरस अथवा पेरासाइट्स के कारण भी हो सकता है। इसके अलावा निमोनिया सूक्ष्म जीव, कुछ दवाओं, और अन्य रोगों के संक्रमण से भी हो सकता है। हमारे शरीर में सांस लेने के अंग होते हैं फेफड़े, फेफड़े स्पंज जैसे अंग होते हैं जिनमें ऑक्सीजन तथा कार्बन डाई आक्साईड का आदान प्रदान होता है। फेफड़ों का अधिकतर भाग छोटे-छोटे गुब्बारेनुमा झिल्लियों का बना रहता है । इससे फेफड़े का वो हिस्सा गैस के स्थानांतरण के लायक नहीं रहता। इसके अलावा फेफड़ों की ब्लड-स्पलाई बहुत अधिक होती है। इन किटाणुओं का रक्त के द्वारा शरीर के बाकी हिस्सो में संचार बहुत तेजी से होता है और शरीर बैक्टीरिमिया या स्पटीसिमिया में चला जाता है ये स्थिति बहुत घातक होती है जिससे थोड़ी ही देर में मृत्यु हो सकती है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सिटी हॉस्पिटल की डॉक्टर अंजु गुप्ता ने बताया कि आखिर ये क्यों होता है और बच्चों में इसके होने के लक्षण को कैसें पहचाने।