टिकट न मिलने पर रोई कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता, कहा- परिवार की कुर्बानियों का मिला ये सिला

शर्मा ने कहा कि वह अनूपशहर में हुई प्रियंका गांधी वाद्रा की रैली में बड़ी संख्या में महिलाओं के लेकर गई थीं, लेकिन उनके काम को स्वीकार नहीं किया गया। शर्मा ने कहा कि पार्टी को इस बात का सर्वे कराकर टिकट देने चाहिये थे किसने क्या काम किया। उन्होंने सिकंदराबाद की एक और पार्टी कार्यकर्ता का जिक्र करते हुए कहा पार्टी के लिये लगन के साथ काम करने के बावजूद उन्हें भी टिकट नहीं दिया गया। 

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बुलंदशहर: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Vidhansabha chunav) का आगाज हो चुका है सभी पार्टी धीरे धीरे अपने पत्ते खोल रही हैं। सभी एक-एक करके अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर रहे हैं। लेकिन बहुत से कार्यकर्ता और नेताओं को राजनीतिक दलों ने पीछे छोड़ दिया जिससे वो कभी दल बदल रहे हैं तो कभी निर्दलीय खड़े हो रहे हैं। इन्हीं में एक नाम शामिल है कांग्रेस की कार्यकर्ता गीता रानी शर्मा का जिनको पार्टी से उम्मीद थी की टिकट मिलेगा लेकिन उनके हाथ निराशा लगी तो वो निर्दलीय ही मैदान में कूद गई हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा की बुलंदशहर सदर सीट से कांग्रेस का टिकट हासिल करने में नाकाम रही पार्टी की कार्यकर्ता निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन पत्र दाखिल करने के दौरान अपनी निराशा छिपा नहीं पाई और फूट-फूटकर रोने लगी। गीता रानी मिश्रा ने अपनी शिकायत मीडिया के सामने बयां की और कहा कि उनके पिता 30 साल तक पार्टी के साथ जुड़े रहे और उन्होंने अपना सबकुछ पार्टी को न्यौछावर कर दिया। 

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शर्मा ने कहा कि वह अनूपशहर में हुई प्रियंका गांधी वाद्रा की रैली में बड़ी संख्या में महिलाओं के लेकर गई थीं, लेकिन उनके काम को स्वीकार नहीं किया गया। शर्मा ने कहा कि पार्टी को इस बात का सर्वे कराकर टिकट देने चाहिये थे किसने क्या काम किया। उन्होंने सिकंदराबाद की एक और पार्टी कार्यकर्ता का जिक्र करते हुए कहा पार्टी के लिये लगन के साथ काम करने के बावजूद उन्हें भी टिकट नहीं दिया गया। 

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