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बस ड्राइवर निकोलस मादुरो कैसे बने वेनेजुएला के राष्ट्रपति, जिन्हें अमेरिकी सेना उठा ले गई
Who is Nicolas Maduro: डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को दावा किया कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी फोर्सेज ने गिरफ्तार कर लिया है। मादुरो कभी बस ड्राइवर हुआ करते थे, जानिए कैसे प्रेसीडेंट बनें और दुनिया की नजरों में क्यों हैं?

वेनेजुएला के राष्ट्रपति को उठा ले गई अमेरिकी सेना?
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच सालों से चल रहे तनाव में शनिवार को उस वक्त बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ आ गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी फोर्सेस ने पकड़ लिया है। मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को देश से बाहर ले जाया गया है। हालांकि, इस दावे को लेकर वेनेजुएला सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब वेनेजुएला की राजधानी कैराकस में कई धमाकों की खबरें सामने आईं, जिससे पूरे देश में अफरा-तफरी और अनिश्चितता का माहौल बन गया।
निकोलस मादुरो: बस ड्राइवर से राष्ट्रपति तक का सफर
23 नवंबर 1962 को जन्मे निकोलस मादुरो एक साधारण मजदूर परिवार से आते हैं। उनके पिता ट्रेड यूनियन नेता थे। 1990 के दशक की शुरुआत में मादुरो बस ड्राइवर थे। इसी समय, सेना अधिकारी ह्यूगो चावेज ने 1992 में एक असफल तख्तापलट की कोशिश की। मादुरो ने चावेज की जेल से रिहाई के लिए अभियान चलाया और उनके राजनीतिक आंदोलन में सक्रिय हो गए। चावेज के राष्ट्रपति बनने के बाद मादुरो ने राजनीति में कदम रखा, राष्ट्रीय विधानसभा में सीट हासिल की और बाद में विदेश मंत्री भी बने। चावेज ने अपनी मौत से पहले मादुरो को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया।
निकोलस मादुरो राष्ट्रपति बनने के बाद वेनेजुएला में आर्थिक संकट
2013 में राष्ट्रपति बनने के बाद मादुरो के कार्यकाल में वेनेजुएला भयानक आर्थिक संकट से गुजरा। देश में हाइपरइन्फ्लेशन, दवाइयों और खाने की भारी कमी और लाखों लोगों का पलायन हुआ। उनकी सरकार पर चुनावों में धांधली, विपक्ष पर दमन और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आरोप लगते रहे हैं। 2014 और 2017 में हुए विरोध प्रदर्शनों को हिंसक तरीके से कुचलने के आरोपों ने अंतरराष्ट्रीय आलोचना बढ़ा दी।
मादुरो सरकार पर अमेरिका के आरोप
अमेरिका ने मादुरो सरकार पर ड्रग तस्करी, भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए हैं। साल 2020 में वॉशिंगटन ने मादुरो पर औपचारिक रूप से आरोप भी तय किए थे, जिन्हें उन्होंने खारिज किया। 2024 के चुनावों के बाद जनवरी 2025 में मादुरो ने तीसरी बार राष्ट्रपति पद की शपथ ली, लेकिन विपक्ष और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने चुनाव को फर्जी बताया। इसके बाद हजारों प्रदर्शनकारियों को जेल भेजे जाने की खबरें आईं।
नोबेल पुरस्कार से बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव
हाल ही में वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार मिला, जिसे मादुरो सरकार के खिलाफ वैश्विक समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट्स में भी वेनेजुएला की सुरक्षा एजेंसियों पर मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप लगाए गए हैं।
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