Ethanol Fuel India: पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के मालिक E20 पेट्रोल को लेकर क्या मांग कर रहे हैं? लोकलसर्किल्स के सर्वे में E20 पेट्रोल के कारण गाड़ी मालिकों पर क्या असर देखने को मिला? फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां क्या होती हैं और वे सामान्य पेट्रोल गाड़ियों से कैसे अलग हैं?

Flex Fuel Carsएक तरफ मारुति सुजुकी ने हाल ही में अपनी फ्लेक्स-फ्यूल कार लॉन्च की है और सरकार भी देश को 100% इथेनॉल फ्यूल की तरफ ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है। लेकिन इस बदलाव से पुरानी गाड़ियों के मालिक कुछ खास खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि जब से E20 पेट्रोल आया है, गाड़ियों के मेंटेनेंस और पेट्रोल का खर्चा बढ़ गया है। इसलिए, वे चाहते हैं कि उन्हें पहले की तरह बिना इथेनॉल वाला (E0) या सिर्फ 10% इथेनॉल वाला (E10) पेट्रोल भरवाने का ऑप्शन मिले।

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लोकलसर्किल्स के एक सर्वे में यह बात सामने आई है। सर्वे के मुताबिक, 2023 से पहले की पेट्रोल गाड़ी इस्तेमाल करने वाले आधे से ज़्यादा लोग चाहते हैं कि उन्हें E0 या E10 पेट्रोल का विकल्प दिया जाए। कई लोगों का कहना है कि देश भर में E20 फ्यूल लागू होने के बाद से उनका खर्चा बढ़ गया है।

फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां क्या होती हैं?

फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां ऐसी गाड़ियां होती हैं जो अलग-अलग मात्रा में इथेनॉल मिले हुए पेट्रोल पर चल सकती हैं, यहाँ तक कि 100% इथेनॉल (E100) पर भी। इनके इंजन और पार्ट्स को खास तौर पर इस तरह बनाया जाता है कि वे ज़्यादा इथेनॉल को झेल सकें। इससे इंजन की परफॉर्मेंस बेहतर होती है और प्रदूषण भी काफी कम होता है। भारत को पारंपरिक पेट्रोल से पर्यावरण के अनुकूल ईंधन की ओर ले जाने में इन गाड़ियों की भूमिका बहुत अहम हो सकती है। साथ ही, जब ऐसी गाड़ियां बढ़ेंगी तो इथेनॉल बनाने वाली फसलों की मांग भी बढ़ेगी, जिससे देश के किसानों को भी बड़ा फायदा होगा।

खर्चा बढ़ा, गाड़ी मालिकों पर दोहरी मार

2023 से पहले की गाड़ी रखने वाले ज़्यादातर मालिकों का मानना है कि 2025 की शुरुआत से E20 पेट्रोल का इस्तेमाल शुरू होने पर उनकी गाड़ियों को चलाने का खर्च बढ़ गया है। यह सर्वे भारत के 316 जिलों में 42,000 से ज़्यादा पुरानी पेट्रोल गाड़ी मालिकों के बीच किया गया था।

सर्वे में पता चला कि 52% लोगों को माइलेज में कमी और मेंटेनेंस बढ़ने की वजह से 5,000 रुपये या उससे ज़्यादा का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। 20% गाड़ी मालिकों का खर्च 5,000 से 10,000 रुपये तक बढ़ा। वहीं, 17% लोगों को 10,000 से 15,000 रुपये तक ज़्यादा खर्च करने पड़े। 15% लोगों का खर्च 15,000 रुपये से भी ज़्यादा बढ़ गया, जबकि सिर्फ 11% लोग ऐसे थे जिन्हें कोई अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ा।

दूसरी ओर, ग्रेन इथेनॉल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग भारत के लिए पेट्रोल का आयात कम करने का एक बेहतरीन तरीका है। इससे पेट्रोल की कीमत 20 रुपये प्रति लीटर तक कम हो सकती है।

ब्राजील का मॉडल

ब्राजील में पेट्रोल पंपों पर दो नोजल होते हैं। एक बेस पेट्रोल के लिए (जैसा भारत में आज E20 है) और दूसरा E85 या E100 फ्यूल के लिए। अगर भारत में भी यह तरीका अपनाया जाता है और कोई गाड़ी पूरी तरह से इथेनॉल (E100) पर चलती है, तो उस पर वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) नहीं लगेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि E100 में 70% जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) वाले हाइड्रोकार्बन नहीं होते, इसलिए उसे वैट से छूट मिल जाएगी। अभी राज्य सरकारें 100 रुपये के पेट्रोल पर करीब 18 से 20 रुपये वैट वसूलती हैं। यह टैक्स हटने से कीमत में प्रति लीटर 20 रुपये तक का फर्क आ सकता है।