इमरजेंसी फंड वित्तीय सुरक्षा का अहम हिस्सा है, जो नौकरी जाने या मेडिकल खर्च जैसे संकट में बचाता है। इसमें 3 से 6 महीने के खर्चों के बराबर रकम होनी चाहिए। इस फंड को एक अलग सेविंग्स अकाउंट में रखना बेहतर है, जहाँ से पैसा आसानी से निकल सके।

नई दिल्लीः जब भी हम भविष्य के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग करते हैं, तो हमारा सारा ध्यान इन्वेस्टमेंट और रिटायरमेंट फंड पर होता है। लेकिन एक और चीज़ है जो उतनी ही ज़रूरी है - और वो है इमरजेंसी फंड। सोचिए, अचानक गाड़ी खराब हो जाए, कोई मेडिकल खर्च आ जाए या नौकरी चली जाए। ऐसे मुश्किल समय में ये फंड आपको किसी से उधार लिए बिना हालात संभालने में मदद करता है। इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि संकट के समय में आप बिना किसी टेंशन के अपने रोज़मर्रा के खर्चे चला सकते हैं।

कितना इमरजेंसी फंड होना चाहिए?

आमतौर पर एक्सपर्ट्स कहते हैं कि आपके पास कम से कम 3 से 6 महीने के खर्चों के बराबर पैसा इमरजेंसी फंड में होना चाहिए। लेकिन अगर आप फ्रीलांसर हैं, आपकी इनकम फिक्स नहीं है, या घर में कोई बीमार रहता है या आप पर कोई निर्भर है, तो आपके लिए 6 से 12 महीने के खर्च के बराबर फंड रखना बेहतर है।

कैसे हिसाब लगाएं?

सबसे पहले, एक लिस्ट बनाइए कि आपको हर महीने किन-किन ज़रूरी चीज़ों पर खर्च करना पड़ता है। इसमें ये सब शामिल होना चाहिए:

  • लोन की EMI और दूसरी किस्तें
  • बिजली, पानी, इंटरनेट के बिल
  • घर का राशन और रोज़ के दूसरे खर्चे
  • इंश्योरेंस की किस्तें (प्रीमियम)
  • बच्चों की स्कूल फीस
  • आने-जाने का खर्च (ट्रैवल)

इन सभी खर्चों को जोड़ लें। अब इस कुल रकम को 3 से 6 से गुणा करें। जो रकम आएगी, उतना ही आपका इमरजेंसी फंड होना चाहिए। जैसा कि पहले बताया, अगर आपकी इनकम रेगुलर नहीं है, तो इसे 6 से 12 से गुणा करके हिसाब लगाएं।

कैसे शुरू करें?

इमरजेंसी फंड एक झटके में तैयार नहीं होता। आप छोटी-छोटी रकम से शुरुआत कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपका महीने का खर्च 25,000 रुपये है, तो 6 महीने के लिए आपका टारगेट 1.5 लाख रुपये होगा। आप हर महीने 500 से 1,000 रुपये बचाकर भी इसकी शुरुआत कर सकते हैं। जब भी कोई बोनस, टैक्स रिफंड या कहीं से एक्स्ट्रा पैसा आए, तो उसे इस फंड में डालना एक अच्छा फैसला हो सकता है।

पैसा कहां रखें?

इमरजेंसी फंड को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां से आप इसे आसानी से और जल्दी निकाल सकें। लेकिन इसे अपने रोज़ के खर्च वाले अकाउंट में न रखें। इसके लिए एक अलग सेविंग्स अकाउंट खुलवाना सबसे अच्छा तरीका है।