दिवाली से पहले मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के डीए में 3% की बढ़ोतरी की है। इससे डीए 50% से बढ़कर 53% हो गया है। यह बढ़ोतरी 1 जुलाई से लागू होगी और कर्मचारियों को 3 महीने का एरियर मिलेगा।

बिजनेस डेस्क : दिवाली से पहले मोदी सरकार ने देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों को महंगाई भत्‍ते (DA) का तोहफा दिया है। बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने डीए में 3% बढ़ोतरी की। फेस्टिव सीजन में हुई इस बढ़ोतरी के बाद अब महंगाई भत्ता 50% से बढ़कर 53% पहुंच गया है। बढ़ा हुआ डीए 1 जुलाई से लागू होता है। मतलब कर्मचारियों को 3 महीने का एरियर दिया जाएगा। इसका फायदा करीब 49.18 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 64.89 लाख पेंशन पाने वालों को होगा। आइए जानते हैं आखिर यह DA होता क्या है, इससे कर्मचारियों को क्या फायदा होता है, सरकार कब डीए बढ़ाती है और आपकी सैलरी पर इसका कितना असर पड़ता है...

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DA कब बढ़ता है

सरकार हर साल 6-6 महीने पर दो बार महंगाई भत्‍ता यानी डीए (Dearness Allowance) बढ़ाती है। जनवरी और जुलाई में इजाफा होता है। डीए सैलरी का ही हिस्सा होता है। इसमें हुई बढ़ोतरी की गणना हमेशा बेसिक सैलरी (Basic Salary) पर ही होती है। इसका फायदा कर्मचरियों को होता है।

DA क्या होता है और क्यों दिया जाता है

सरकार महंगाई से निपटने के लिए कर्मचारियों को DA देती है। डीए यानी महंगाई भत्ता ऐसा पैसा है, जो महंगाई बढ़ने पर सरकारी कर्मचारियों के जीवन स्तर को बनाए रखने के लिए सरकार देती है। ये पैसा सरकारी कर्मचारियों के अलावा पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलता है। इसका कैलकुलेशन देश की मौजूदा महंगाई के हिसाब से हर 6 महीने पर किया जाता है। आसान भाषा में कहें तो बेसिक सैलरी में ग्रेड सैलरी को जोड़ने के बाद जो सैलरी बनती है, उसमें DA के परसेंट (दर) का गुणा करने पर जो आता है, वही महंगाई भत्ता यानी डियरनेस अलाउंस (DA) होता है।

10 हजार रुपए की बेसिक सैलरी पर कितना फायदा

डीए अमाउंट निकालने का फॉर्मूला- बेसिक पे + ग्रेड पे × DA% होता है। इस हिसाब से अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 10,000 रुपए और ग्रेड पे 1,000 रुपए है। दोनों को मिलाकर 11 हजार रुपए हो गए। अब महंगाई भत्ता 3% बढ़कर 53% हो गई है, जो 11 हजार की 5,830 रुपए हुई। इस हिसाब से कुल सैलरी 16,830 रुपए मिलेगी।

सरकार महंगाई भत्ता किस हिसाब से बढ़ाती है

देश में दो तरह की महंगाई होती है। रिटेल (खुदरा) और थोक महंगाई। रिटेल महंगाई की दर आम लोगों की ओर से दिए जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है। इसे कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) कहा जाता है। अब महंगाई भत्ता तय करने का एक फॉर्मूला है। पिछले 12 महीने के ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI) का एवरेज - 115.76 /115.76]×100...अगर कोई केंद्रीय सरकारी कर्मचारी है तो उसके महंगाई भत्ते का प्रतिशत निकालने के लिए पिछले 3 महीने की AICPI का औसत (बेस ईयर 2001= 100)-126.33) x 100 करने पर कैलकुलेशन निकल जाएगा।

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