पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लंबे समय से कोई कटौती नहीं की गई है। हालांकि, आगामी लोकसभा चुनाव, कच्चे तेल के भाव में कमी और भारत के खाड़ी देशों से क्रूड के बड़े पैमाने पर आयात के चलते आने वाले समय में इसके दामों में कमी देखने को मिल सकती है।

Petrol-Diesel Price: क्या लोकसभा चुनाव से पहले पेट्रोल-डीजल के दाम कम होंगे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (क्रूड) की कीमतों में गिरावट के साथ ही भारत अब खाड़ी देशों से बड़े स्तर पर तेल का आयात कर रहा है। इसके चलते माना जा रहा है कि 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती की जा सकती है। हालांकि, ये कितनी होगी इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता।

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UAE और सउदी अरब से बढ़ा भारत का तेल आयात

रिपोर्ट्स के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब से अक्टूबर, 2023 में भारत का कुल ऑयल इंपोर्ट 10 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। रूसी तेल के लिए छूट में कमी किए जाने के बाद से ही भारत के रिफाइनर्स अब सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से ज्यादा कच्चा तेल खरीद रहे हैं। यहां तक कि अक्टूबर के महीने में भारतीय तेल बाजार में रूस की हिस्सेदारी पिछले 9 महीने में सबसे कम रही है।

भारत ने अक्टूबर में 4.7 मिलियन बैरल प्रति दिन किया आयात

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रूस द्वारा तेल में दी जा रही छूट में कमी करने के बाद अब भारत को रूस से तेल खरीदने में कोई खास मुनाफा नहीं हो रहा है। ऐसे में भारत अब खाड़ी देशों से तेल आयात बढ़ा रहा है। भारत ने अक्टूबर में करीब 4.7 मिलियन बैरल प्रति दिन (BPD) कच्चे तेल का आयात किया है। यह पिछले महीने से 8.4% ज्यादा है।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक
बता दें कि अप्रैल से अक्टूबर, 2023 तक रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्ति करने वाला देश था। रूस के बाद इराक और सऊदी अरब का नंबर थे। बता दें कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादा से ज्यादा कच्चा तेल खाड़ी देशों से आयात करता है। हालांकि, पिछले कुछ महीनों से भारत रूस से सस्ते में तेल खरीद रहा था। लेकिन अब उसे इसमें कोई फायदा नहीं हो रहा है।

क्या कम होंगे पेट्रोल-डीज के दाम?

खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में तेल खरीदने के साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की वजह से आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल के दाम कम हो सकते हैं। कच्चा तेल फिलहाल 78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। अगर कच्चे तेल की कीमत स्थिर रहती हैं तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमत में कटौती का फैसला कर सकती हैं।

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