JPSC ACF Mains Exam 2026 Question Paper Errors: JPSC सहायक वन संरक्षक मुख्य परीक्षा 2026 विवादों में घिर गई है। 4 से 12 अप्रैल तक आयोजित परीक्षा के प्रश्नपत्रों में अनगिनत गलतियां सामने आई हैं। इनमें भाषा, व्याकरण की अशुद्धियां, गलत अनुवाद, अधूरे, अस्पष्ट प्रश्न, फॉर्मेटिंग की गड़बड़ी के साथ-साथ कई जगह कॉन्सेप्ट से जुड़ी गंभीर त्रुटियां शामिल हैं।

Jharkhand Forest Officer Exam Errors: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा आयोजित सहायक वन संरक्षक (ACF) मुख्य परीक्षा अब गंभीर विवादों में घिर गई है। 4 से 12 अप्रैल से शुरू हुई इस परीक्षा के प्रश्नपत्रों में भारी संख्या में अशुद्धियां सामने आई हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि हर पेपर में 100 से अधिक गलतियां हैं, जिससे न केवल पेपर की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता भी कटघरे में है। इतना ही नहीं अब ये क्वेश्न पेपर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं और यूजर JPSC के सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

जब सवाल ही गलत, तो जवाब क्या दें छात्र?

छात्रों के अनुसार, प्रश्नपत्र में ऐसी-ऐसी गलतियां हैं कि कई बार समझ ही नहीं आता कि सवाल पूछा क्या गया है। कई जगह भाषा गलत, अनुवाद गलत, प्रश्न अधूरे और कुछ तो कॉन्सेप्ट ही गलत हैं। इससे छात्रों का समय बर्बाद हुआ और मानसिक दबाव भी बढ़ा। प्रश्नपत्र से सामने आए कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं, जिसे आप क्वेश्न पेपर में भी देख सकते हैं।

  • झारखंड राज्य (2000 एडि) के गढन के उखय कारणे को स्पष्ट कीजिए, विशेष रुप से क्षेत्रीय पहचान, आर्थिक शोषण, संसाधनों के नियंत्रण और प्रमुख जन आंएलनों के संदर्भ में। इस सवाल में गठन की जगह गढन, मुख्य की जगह उखय, कारणों की जगह कारणे, रूप की जगह रुप, आंदोलनों की जगह आंएलनों लिखा गया है।
  • अस्पष्ट और अधूरा सवाल: “Explain the scientific principle behind the functioning of a pressure cooker. State five advantages…” यह सवाल सही दिखता है, लेकिन हिंदी में इसका अनुवाद कई जगह टूटा और गलत संरचना वाला है, जिससे हिंदी माध्यम के छात्रों को समझने में परेशानी हुई। हिंदी का सवाल कुछ इस तरह से लिखा गया है- दबाव कुकर के कार्य करने के पीछे, के वैज्ञानिक पांच सिहधांत को समजाइए। दैनिक जीवन में खाना पकने केलिए इसका उपयोग करने के लाभ बताइए।
  • गलत अनुवाद से बदला सवाल का अर्थ: “Discuss the Nature of Indian State…” हिंदी में संघीय को संछीय, अर्धसंघीय को अर्धसंधीम और सहकारी संघवाद को सहकारी संधवाद लिखा गया, जो पूरी तरह से गलत शब्द हैं।
  • निर्देश ही अधूरे: “Differentiate between sound waves and light waves…” आगे लिखा है “Explain why we see the lightning first…” लेकिन हिंदी में निर्माण को निर्मान, समझाइए को समजाइए, हम को टम लिखा गया।

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  • नंबरिंग में गड़बड़ी: एक ही सेक्शन में 1 नंबर दो बार, कहीं 2 के बाद फिर 1, इससे छात्रों को उत्तर लिखते समय कंफ्यूजन हुआ कि किस सवाल का जवाब किस नंबर में दें।
  • तथ्य और विषय में असंगति: “What is hard water? Explain two problems…” यह सवाल विज्ञान का है, लेकिन हिंदी में कुछ शब्दों का चयन ऐसा है कि कॉन्सेप्ट स्पष्ट नहीं होता, जैसे “विशिष्ट प्रकार के कठोर जल” का संदर्भ अधूरा छोड़ दिया गया।
  • मिश्रित और गलत भाषा प्रयोग: कई सवालों में हिंदी और अंग्रेजी को ऐसे मिलाया गया है कि वाक्य समझना मुश्किल हो गया। उदाहरण- “रोल ऑफ सोशल मूवमेंट्स…” “एनालाइज द प्रॉब्लम…” यह न तो शुद्ध हिंदी है, न सही अंग्रेजी।
  • प्रिंटिंग और लेआउट की समस्या: कुछ शब्द कटे हुए, लाइन ब्रेक गलत जगह, टेक्स्ट टेढ़ा या धुंधला। इससे पढ़ने में समय ज्यादा लगा।

छात्रों का गुस्सा: “ये परीक्षा है या मजाक?”

परीक्षार्थियों का कहना है कि “हम सालों तैयारी करते हैं और पेपर में ऐसी गलतियां मिलती हैं। ये हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ है।” ई छात्रों ने यह भी कहा कि अगर पेपर में इतनी गड़बड़ी है, तो मूल्यांकन (Evaluation) भी संदिग्ध हो सकता है।

वायरल पोस्ट पर कमेंट करते हुए Kaushal ने लिखा चलिए, कोई तो उठाया ये मुद्दा। मैं एग्जाम हॉल में ऐसा पेपर देख कर सर पीट लिया।

ण्क अन्य यूजर Dr. Arvind Kumar ने लिखा- जब सीट को बेचना ही मकसद हो तो प्रश्न पत्र की अशुद्धि पर कौन ध्यान देता है । ऐसे अनगिनत कमेंट्स पोस्ट पर भरे पड़े हैं।

JPSC सिस्टम पर बड़ा सवाल

यह मामला सिर्फ एक परीक्षा की गलती नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कमजोरी को दिखाता है और कई सवाल खड़े करती है। जैसे-

  • क्या पेपर बिना प्रूफरीडिंग के छप रहे हैं?
  • क्या विषय विशेषज्ञों की कमी है?
  • क्या आयोग की निगरानी व्यवस्था फेल हो चुकी है?
  • JPSC जैसी प्रतिष्ठित संस्था से ऐसी चूक न सिर्फ परीक्षा की साख गिराती है, बल्कि युवाओं के भरोसे को भी तोड़ती है।