PSU Jobs in India: ₹23 लाख की पीएसयू जॉब में सिर्फ ₹15 हजार महीना खर्च बाकी बचत का एक रेडिट पोस्ट वायरल हो रहा है। पोस्ट करने वाले 27 साल के कर्मचारी ने बताया कैसे 90% तक बचत, फ्री सुविधाएं और आर्थिक सुरक्षा मिलती है।

PSU Job Benefits Viral Post: सरकारी नौकरी बनाम एमएनसी की बहस में सिर्फ सैलरी नहीं, सेविंग भी बड़ा फैक्टर है। एक 27 साल के पीएसयू कर्मचारी ने रेडिट पर अपना एक्सपीरियंस शेयर करते हुए बताया कि कैसे ₹23 लाख के सीटीसी के साथ कम खर्च और कंपनी की सुविधाओं की वजह से उसकी सेविंग काफी ज्यादा हो जाती है। क्या कहा पूरी डिटेल जानने के लिए आगे पढ़ें।

₹1.3 लाख की मंथली कमाई, खर्च सिर्फ ₹15 हजार

रेडिट पर शेयर किए गए एक्सपीरियंस के मुताबिक, कर्मचारी की सालाना सीटीसी करीब ₹23 लाख है। उसका कहना है कि हर महीने अलग-अलग मदों में करीब ₹1.3 लाख का फायदा मिलता है। इसमें लगभग ₹28 हजार का परफॉर्मेंस रिलेटेड पे, करीब ₹14 हजार एनपीएस में कंपनी का कॉन्ट्रिब्यूशन और लगभग ₹1 लाख की सैलरी शामिल है। उसके मुताबिक, रिमोट और ग्रामीण पोस्टिंग के दौरान कंपनी की तरफ से मिलने वाली फैसिलिटीज खर्च को काफी कम कर देती हैं। उसे रहने के लिए अकोमोडेशन, फ्यूल और बिजली जैसी सुविधाएं मिलती हैं, जबकि ऑफिस में खाना भी काफी सब्सिडाइज्ड है। यही वजह है कि उसका पर्सनल मंथली खर्च करीब ₹15 हजार के आसपास रहता है।

असली फायदा सैलरी से ज्यादा ‘लो-कॉस्ट लाइफ’ का

कर्मचारी के एक्सपीरियंस की खास बात यह है कि वह पीएसयू नौकरी की तुलना सिर्फ सीटीसी से नहीं करता। उसका तर्क है कि बड़े शहरों में काम करने वाले कर्मचारियों की कमाई का बड़ा हिस्सा रेंट, ईएमआई, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा के खर्च में चला जाता है। वहीं, दूरदराज की पोस्टिंग में खर्च करने के ऑप्शन ही काफी कम होते हैं। उसने बताया कि हर महीने मिलने वाला परफॉर्मेंस पे कई बार उसके पूरे खर्च को कवर कर देता है। ऐसे में बैंक अकाउंट में आने वाली सैलरी का बड़ा हिस्सा सेव हो जाता है।

सुविधाओं के साथ लोन और एनपीएस का भी सपोर्ट

पोस्ट में कर्मचारी ने पीएसयू नौकरी के दूसरे फाइनेंशियल बेनिफिट्स का भी जिक्र किया। उसके मुताबिक, कर्मचारियों को करीब ₹10 लाख तक का लोन और लगभग ₹50 लाख तक का होम लोन अपेक्षाकृत कम ब्याज पर मिल सकता है। साथ ही एनपीएस में नियमित कंपनी कॉन्ट्रिब्यूशन रिटायरमेंट फंड तैयार करने में मदद करता है। हालांकि, ये सुविधाएं हर पीएसयू, पद और कर्मचारी की सर्विस कंडीशंस में एक जैसी हों, यह जरूरी नहीं है। इसलिए इसे पूरे पीएसयू सेक्टर पर लागू नियम मानना सही नहीं होगा।

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पैसा मिल रहा है, लेकिन करियर ग्रोथ पर सवाल

इस कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि कर्मचारी खुद अपनी नौकरी को पूरी तरह आइडियल नहीं मानता। उसका कहना है कि एमएनसी छोड़कर पीएसयू में आने के बाद फाइनेंशियल सिक्योरिटी तो बढ़ी, लेकिन प्रोफेशनल ग्रोथ और काम में उत्साह कम हो गया। वह खुद को एक ऐसे सरकारी कर्मचारी के रूप में देखने लगा है, जो काम में पहले जैसी दिलचस्पी महसूस नहीं करता। इसी वजह से अब वह टॉप बिजनेस स्कूल से एमबीए करने और आगे चलकर टियर-1 शहर में ज्यादा मीनिंगफुल करियर बनाने की तैयारी कर रहा है। नीचे देखें वायरल पोस्ट-

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पीएसयू बनाम एमएनसी: फैसला सिर्फ पैकेज देखकर नहीं

इस एक्सपीरियंस से एक बात साफ होती है कि करियर का बेहतर ऑप्शन हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। पीएसयू नौकरी में जॉब सिक्योरिटी, सब्सिडाइज्ड फैसिलिटीज, एनपीएस और कम लिविंग एक्सपेंस बड़ा फाइनेंशियल एडवांटेज दे सकते हैं। दूसरी तरफ, एमएनसी में तेज करियर ग्रोथ, स्किल डेवलपमेंट, बेहतर एक्सपोजर और बड़े शहरों में काम करने के मौके मिल सकते हैं। आखिर में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कौन कितना कमाता है, बल्कि यह भी है कि कौन कितना सेव करता है और बदले में उसे किस तरह की लाइफस्टाइल और करियर ग्रोथ मिलती है।