UPSC में 4 बार फेल होने के बाद एक छात्र ने अपनी सारी किताबें ₹464 में बेच दीं। नौकरी और रिश्ता गंवाने वाले इस छात्र की भावुक रेडिट पोस्ट वायरल हो गई है, जो कई उम्मीदवारों का दर्द दिखाती है।
नई दिल्ली: सिविल सर्विस की परीक्षा UPSC की तैयारी में सालों लगाने के बाद एक लड़के का सपना टूट गया। चार बार फेल होने के बाद उसने अपनी सारी किताबें और नोट्स सिर्फ 464 रुपये में कबाड़ीवाले को बेच दिए। लड़के ने रेडिट पर एक पोस्ट लिखकर अपनी इस इमोशनल कहानी को शेयर किया है, जो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। ये पोस्ट ऐसे समय में वायरल हुई है जब भारत में छात्र कई मुद्दों पर प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकारी नौकरियों की कमी को लेकर भी बहस छिड़ी हुई है।
चार साल की तैयारी, नतीजा सिफर!
लड़के ने अपनी पोस्ट में बताया कि उसने 2023, 2024 और 2025 में लगातार UPSC मेन्स की परीक्षा दी, लेकिन पास नहीं हो सका। 2026 में तो वह प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं कर पाया। इसके बाद उसने फैसला किया कि अब वह UPSC की परीक्षा नहीं देगा। उसने अपनी तैयारी में इस्तेमाल की गईं NCERT की किताबें, एम। लक्ष्मीकांत की 'इंडियन पॉलिटी', पुराने टेस्ट पेपर, मॉक टेस्ट और अपने हाथ से बनाए गए नोट्स, सब कुछ कबाड़ीवाले को बेच दिया।
उसने लिखा, "जब कबाड़ीवाला एक-एक करके किताबों को तराजू पर रख रहा था, तो मुझे अंदर से बिल्कुल खालीपन महसूस हो रहा था।" उसने आगे कहा, "वो सिर्फ कागज नहीं थे। उनमें सुबह 4 बजे उठकर बनाए गए एनालिसिस शीट, दिए गए टेस्ट, सुधारे गए जवाब और सालों की मेहनत छिपी थी।"
नौकरी गई, प्यार भी छूटा
लड़के ने बताया कि उसने 2022 में एक अच्छी-खासी सैलरी वाली नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी शुरू की थी। इस दौरान उसका चार साल पुराना रिश्ता भी टूट गया। उसने कई बार हिम्मत जुटाकर फिर से कोशिश की, लेकिन आखिर में उसने सब कुछ खत्म करने का फैसला कर लिया। किताबें बेचने पर उसे सिर्फ 464 रुपये मिले। जब किसी ने कहा कि वह 600 रुपये तक ले सकता था, तो उसने जवाब दिया, "अब 100-200 रुपये ज्यादा मिलने से कोई फर्क नहीं पड़ता।"
बाद में उसने वो 464 रुपये एक मंदिर में दान कर दिए। उसने साफ लिखा कि यह दान अगली कोशिश के लिए किस्मत आजमाने के लिए नहीं था, क्योंकि अब कोई अगली कोशिश होगी ही नहीं। इस पोस्ट ने कई मौजूदा और पूर्व UPSC उम्मीदवारों को भावुक कर दिया। बहुत से लोगों ने कमेंट्स में अपने ऐसे ही अनुभव शेयर किए और कहा कि वे सालों की मेहनत और त्याग के इस दर्द को समझ सकते हैं।


