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श्रीगंगानगर:मेले में 2.5-1.25 करोड़ के घोड़े, एक बार में पीते 50 Ltr दूध, महीने का खर्च लाखों में,जानें खासियत
श्रीगंगानगर। राजस्थान के श्रीगंगानगर में पदमपुर बाइपास रोड पर घोड़ों के मेले में खासी चहल-पहल बढ़ गई है। यहां पंजाब के कई शहरों से बेहतरीन कद-काठी के घोड़े पहुंच रहे हैं। ये मेला महाराणा प्रताप घोड़ा पालक समिति की तरफ से लगा गया है। मेले में पंजाब के पटियाला, मलोट, मुक्तसर आदि शहरों से घोड़े आए हैं। इनमें घोड़ों के खरीदार और बेचने वाले दोनो ही शामिल हैं। पिछले 19 साल से चल रहा मेला शुरुआती दौर में है। ऐसे में घोड़ों के सौदे तो अभी नहीं हुए हैं, लेकिन घोड़ों के शौकीन उनके रंग और चमक देखकर जानकारियां ले रहे हैं। आईए आपको बताते हैं दो ऐसे घोड़े के बारे में, जिनके खान-पान का खर्च और कीमत सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है...

ये मारवाड़ी घोड़ा ‘हीरा’ है। इसे श्रीगंगानगर जिले के पदमपुर में रहने वाले इकबाल सिंह 9 साल से देखरेख कर रहे हैं। इसका ढाई करोड़ रुपए तक ऑफर मिल चुका है। यानी इकबाल अगर इस घोड़े को बेचते हैं तो उन्हें ढाई रुपए मिलेंगे। जी हां, सुनकर चौंक गए ना आप..। लेकिन, ये सच है। अब आप इस घोड़े के खान-पान और हर महीने का मेंटेनेंस सुनेंगे तो दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे।
इकबाल की मानें तो ‘हीरा’ एक बार में 50 किलो दूध पी जाता है। हालांकि, हफ्ते में उसे दो बार ही दूध पिलाया जाता है। हर महीने हीरा के खान-पान और अन्य जरूरी चीजें खिलाने में करीब डेढ़ लाख रुपए का खर्च आता है।
श्रीगंगानगर के मेले में इस घोड़े की खूब चर्चा हो रही है। इकबाल सिंह बताते हैं कि इस मेले में आए अन्य घोड़ों से ‘हीरा’ की ऊंचाई सबसे ज्यादा है। आमतौर पर घोड़े की ऊंचाई 160 सेंटीमीटर होती है, लेकिन हीरा की ऊंचाई करीब 170 CM है।
घोड़े की ये भी खासियत
•मारवाड़ी नस्ल का घोड़ा है।
•इसके पैर मजबूत हैं। दो पांव सफेद हैं।
•डाइट में चना, जौ, दूध, मूंगफली का नीरा दिया जाता है।
•गर्मी में सरसों और सर्दी में तिल का तेल देते हैं, ताकि डाइजेशन अच्छा बना रहे।
•आंत चिकनी रहती है और घोड़े की स्किन पर चमक आती है।
•इसकी ऊंचाई 68 इंच यानी 170 सेमी है।
इकबाल बताते हैं कि उनकी कॉटन फैक्ट्री है। इसके साथ खेती का भी काम करते हैं। इस घोड़े के अब तक 200 से ज्यादा बच्चे हो चुके हैं। इसकी ब्रीड बहुत अच्छी है, इसलिए इसकी ज्यादा मांग है। बच्चे भी ज्यादा हाइट वाले हैं।
इकबाल घोड़े के शौकीन हैं। 9 साल पहले ‘हीरा’ को पाला था। साढ़े तीन साल की उम्र से उसकी डाइट का ख्याल रखते हैं। 7 साल की उम्र तक उसे रोजाना 50 लीटर दूध पिलाया जाता था। अभी उसे सप्ताह में दो बार 50-50 लीटर दूध पिलाते हैं। हीरा की कद-काठी देखकर राजस्थान और यूपी के घोड़ों के शौकीन खासे प्रभावित हुए और ढाई करोड़ रुपए का ऑफर कर चुके हैं।
इस मेले में सवा करोड़ रुपए का घोड़ा राज दिलावर भी आया है। इसके मालिक लालराज सिंह बताते हैं कि उनका घोड़ा रत्नाकर ब्लर लाइन ब्रीड का है। अभी 70 लाख रुपए का ऑफर मिला है। लेकिन, सवा करोड़ मिलेंगे तो बेचेंगे। लालराज श्रीगंगानगर जिले के श्रीनगर गांव में रहते हैं। वे बताते हैं कि इस घोड़े के 35 बच्चे हो चुके हैं। ये सभी 7 से 8 लाख रुपए तक की कीमत में बिके हैं। इस घोड़े को चना, जौ और घी देते हैं। वे बताते हैं कि घोड़े के कान जुड़े हों, गर्दन लंबी और ताकतवर शरीर हो तो उसकी मांग ज्यादा रहती है।
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