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रवि और सर्वार्थसिद्धि योग में किए गए कामों में मिलती है सफलता, जानिए कब बनते हैं ये योग?

हिंदू धर्म में हर शुभ कार्य से पहले मुहूर्त अवश्य देखा जाता है। मान्यता है कि शुभ योग व मुहूर्त में मांगलिक कार्य करने से उसकी शुभता और भी बढ़ जाती है। ये शुभ योग तिथि, नक्षत्र, वार, ग्रह आदि के आधार पर निश्चित होते हैं। हम अक्सर कई शुभ योगों के बारे में सुनते हैं।

Astrology chores done in sarvartha siddhi and ravi yoga gain you success
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Ujjain, First Published Oct 28, 2021, 6:30 AM IST
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उज्जैन. जब भी शुभ योगों की बात होती है, उनमें अक्सर रवियोग (Ravi Yoga) और सर्वार्थसिद्धि योग (Sarvarthasiddha Yoga) की चर्चा अवश्य होती है। ये बहुत ही सामान्य शुभ योग हैं, जो अक्सर बनते रहते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन दोनों शुभ योगों में किए गए मांगलिक कार्य हमेशा शुभ फल प्रदान करते हैं। आगे जानिए रवियोग और सर्वार्थसिद्धि योग क्या होते हैं और कैसे बनते हैं? 

कैसे बनता है रवि योग? 
- ज्योतिषीय परिभाषा के अनुसार सूर्य जिस नक्षत्र पर हो, उस नक्षत्र से वर्तमान चंद्र नक्षत्र चौथा, छठा, नवां, दसवां, तेरहवां और बीसवां हो तो रवियोग बनता है। 
- उदाहरण के लिए यदि सूर्य अश्विनी नक्षत्र पर है तो चौथा रोहिणी, छठा आर्द्रा, नवां आश्लेषा, 10वां मघा, 13वां हस्त और 20वां पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र पर चंद्रमा हो तो उस दिन रवियोग होता है। 
- रवियोग समस्त दोषों को नष्ट करने वाला माना गया है। इसमें किया गया कार्य शीघ्र फलीभूत होता है। 
- यदि उक्त नक्षत्रों के साथ रविवार आ जाए तो रविवार-आश्लेषा के योग से 9 वज्र, रविवार-मघा के योग से 10 मुद्गर योग बन जाता है जिसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।

कैसे बनता है सर्वार्थसिद्धि योग?
- रविवार को हस्त, मूल, तीनों उत्तरा- उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, पुष्य और अश्विनी ये 7 नक्षत्र हों तो ये शुभ योग बनता है।
- सोमवार को श्रवण, रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य और अनुराधा ये 5 नक्षत्र हों तो ये शुभ योग बनता है। 
- मंगलवार को अश्विनी, उत्तराभाद्रपद, कृतिका और आश्लेषा ये 4 नक्षत्र हों तो ये शुभ योग बनता है। 
- बुधवार को रोहिणी, अनुराधा, हस्त, कृतिका, पुनर्वसु, मृगशिरा ये 6 नक्षत्र हों तो ये शुभ योग बनता है। 
- गुरुवार को रेवती, अनुराधा, अश्विनी, पुनर्वसु, पुष्य ये 5 नक्षत्र हों तो ये शुभ योग बनता है। 
- शुक्रवार को रेवती, अनुराधा, अश्विनी, पुनर्वसु और श्रवण ये 5 नक्षत्र हों तो ये शुभ योग बनता है। 
- शनिवार को श्रवण, रोहिणी, स्वाति ये 3 नक्षत्र हों तो सर्वार्थसिद्धि योग बनता है। इसमें किया गया कार्य सफल होता है।

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