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पाप ग्रह हैं राहु-केतु, इन दोनों के कारण ही कुंडली में बनता है कालसर्प दोष, जानिए इससे जुड़ी खास बातें

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु और केतु दोनों पाप ग्रह हैं। अन्य ग्रहों की तरह इनका कोई वास्तविक स्वरूप नहीं है। इसलिए इन्हें छाया ग्रह कहते हैं। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु-केतु से जुड़े दोष होते हैं तो ऐसे लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ये दोनों ग्रहों के कारण ही कुंडली में कालसर्प योग का निर्माण होता है।

Rahu Ketu is a sin planet, due to these two Kalsarp Dosh is formed in the horoscope, know the special things related to it KPI
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Ujjain, First Published May 31, 2021, 12:41 PM IST
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उज्जैन. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु और केतु दोनों पाप ग्रह हैं। अन्य ग्रहों की तरह इनका कोई वास्तविक स्वरूप नहीं है। इसलिए इन्हें छाया ग्रह कहते हैं। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु-केतु से जुड़े दोष होते हैं तो ऐसे लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ये दोनों ग्रहों के कारण ही कुंडली में कालसर्प योग का निर्माण होता है।

कब बनता है कालसर्प योग?
जब कुंडली में राहु और केतु के मध्य में सारे ग्रह आ जाते हैं तब कुंडली में कालसर्प योग बनता है। कालसर्प योग दो शब्दों को मिलाकर बना है। इसमें पहला शब्द है काल, यानि मृत्यु और दूसरा शब्द है- सर्प, जिसका तात्पर्य सांप से है। कुंडली में कालसर्प योग के प्रभाव से व्यक्ति को मानसिक कष्ट सहना पड़ता है। इसके साथ ही जातकों को कई अन्य परेशानियां होती हैं। 

कालसर्प योग के प्रकार

  1. अनंत कालसर्प योग
  2. कुलिक कालसर्प योग
  3. वासुकी कालसर्प योग
  4. शंखपाल कालसर्प योग
  5. पद्म कालसर्प योग
  6. महापदम कालसर्प योग
  7. तक्षक कालसर्प योग
  8. कर्कोटक कालसर्प योग
  9. शंखनाद कालसर्प योग
  10. पातक कालसर्प योग
  11. विषधर कालसर्प योग
  12. शेषनाग कालसर्प योग

ऐसे मिलते हैं कालसर्प योग के संकेत

  • मानसिक एवं शारीरिक कष्ट का होना
  • पैतृक संपत्ति का नष्ट होना
  • भाई-बंधुओं से धोखा
  • संतान से कष्ट
  • शत्रुओं से निरंतर भय
  • बुरे स्वप्न एवं अनिद्रा रोग
  • कोर्ट कचहरी का सामना

कालसर्प योग से मुक्ति का उपाय
मंदिर में भगवान शंकर का विशेष अभिषेक करें। रूद्राभिषेक कर नौ प्रकार के नागों की प्रतिमा बना उनको नदी में प्रवाहित करें। नागों को प्रवाहित करने के बाद स्नान करें। पहने हुए वस्त्रों का त्याग करें। नवीन वस्त्र धारण करें। नाग स्तोत्र का पाठ करें।

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