हिमाचल प्रदेश के पूर्व MLA होशियार सिंह पर सरकारी फंड के गबन का केस दर्ज हुआ है। आरोप है कि उन्होंने MLA ग्रांट स्कीम के तहत लाभार्थियों के खाते में आए पैसे निकलवाकर अपने पास रख लिए। उन्हीं की कंपनी के कर्मचारियों ने शिकायत दर्ज कराई थी।

शिमला (हिमाचल प्रदेश) [भारत], 20 जुलाई (एएनआई): हिमाचल प्रदेश राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SV&ACB) ने विधायक विवेकानुदान योजना (MLA Discretionary Grant Scheme) के तहत सरकारी धन के कथित गबन के सिलसिले में देहरा के पूर्व विधायक होशियार सिंह चंबयाल के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।

रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह मामला पूर्व विधायक की कंपनी के कर्मचारियों द्वारा दायर एक शिकायत पर प्रारंभिक जांच के बाद दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता भी इस मामले में सूचीबद्ध लाभार्थियों में शामिल हैं।

जांच में क्या सामने आया?

विजिलेंस ब्यूरो ने कहा कि उसने प्रारंभिक सत्यापन के दौरान आधिकारिक रिकॉर्ड, लाभार्थियों के बैंक स्टेटमेंट, सरकारी दस्तावेजों और शिकायतकर्ताओं व अन्य व्यक्तियों के बयानों की जांच की। जांच में कथित तौर पर पता चला कि 2023 और 2024 के दौरान, कई व्यक्तियों के नाम पर विधायक विवेकानुदान योजना के तहत वित्तीय सहायता मंजूर और वितरित की गई थी। हालांकि, शिकायतकर्ताओं और अन्य लाभार्थियों ने कथित तौर पर कहा कि उन्होंने कभी भी ऐसी वित्तीय सहायता के लिए आवेदन नहीं किया था।

ब्यूरो के अनुसार, लाभार्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि अनुदान राशि उनके बैंक खातों में जमा होने के बाद, उन्होंने पूर्व विधायक के निर्देश पर नकदी निकालकर उन्हें सौंप दी। सत्यापन के दौरान एकत्र किए गए दस्तावेजी सबूतों और बैंक रिकॉर्ड के आधार पर, विजिलेंस ब्यूरो ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह संकेत मिला है कि सार्वजनिक धन का उपयोग योजना के तहत निर्धारित उद्देश्यों के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया और वास्तविक लाभार्थियों को स्वीकृत सहायता का लाभ नहीं मिला।

इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ केस

आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी से संबंधित अपराधों के प्रथम दृष्टया सबूत मिलने पर, ब्यूरो ने 16 जुलाई, 2026 को धर्मशाला स्थित SV&ACB पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 409 और 420 के तहत FIR नंबर 05/2026 दर्ज की और औपचारिक जांच शुरू कर दी है।

एजेंसी ने कहा कि जांच में किसी भी अन्य व्यक्ति की भूमिका की भी जांच की जाएगी और यह निर्धारित किया जाएगा कि जांच के दौरान एकत्र किए गए सबूतों के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम या किसी अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत अपराध बनते हैं या नहीं।

एजेंसी ने दिया निष्पक्ष जांच का भरोसा

SV&ACB ने कहा कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और सबूत-आधारित तरीके से की जाएगी, और किसी भी आपराधिक दायित्व का निर्धारण उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के अनुसार ही किया जाएगा। भ्रष्टाचार से निपटने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, ब्यूरो ने कहा कि वह सार्वजनिक धन के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार और सार्वजनिक विश्वास को कमजोर करने वाले अपराधों के प्रति जीरो-टॉलरेंस की नीति का पालन करता है, और यह सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है कि जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और प्रभावी रहे। (एएनआई)

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