तमिलनाडु के करूर में शनिवार को मची भगदड़ में 41 लोगों की मौत हुई थी। इस संबंध में दर्ज FIR में TVK प्रमुख और एक्टर विजय पर आरोप लगाए गए हैं। कहा गया है कि वह भीड़ जुटाने के लिए जानबूझकर देरी से आए। बिना अनुमति के रोड शो किया।

Karur stampede: तमिलनाडु के करूर में शनिवार को एक्टर से नेता बने TVK (तमिलगा वेत्री कझगम) प्रमुख विजय की रैली में भगदड़ मचने से 41 लोगों की मौत हुई थी। इस मामले में दर्ज FIR में विजय पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कहा गया है कि एक्टर जानबूझकर देर से आए। उन्होंने बिना अनुमति के रोड शो किया।

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भीड़ जुटाने के लिए विजय ने आने में देर की

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार TVK के जिला सचिव मथियाझागन ने 10 हजार लोगों के रैली में शामिल होने की बात कहकर अनुमति मांगी थी। विजय के आने की खबर आने के बाद भीड़ 25,000 से ज्यादा हो गई। भीड़ अधिक जुटे इसलिए विजय ने आने में जानबूझकर देर की।

FIR में कहा गया है, "कार्यक्रम समय पर आयोजित करने के बजाय भारी भीड़ दिखाने के लिए विजय के करूर आने में 4 घंटे की देरी की गई। इससे हजारों लोग धूप में खड़े रहे और थक गए। इसके कारण भगदड़ मची।"

विजय ने बिना अनुमति रोड शो किया

FIR के अनुसार विजय शाम करीब 4.45 बजे वेलायुधमपलयम में जिले की सीमा पर पहुंच गए थे। आने में देर होने के बाद भी उन्होंने बिना अनुमति के रोड शो किया। विजय का काफिला शाम 7 बजे वेलुचामिपुरम पहुंचा, तब तक भीड़ बेकाबू हो चुकी थी। पुलिस अधिकारियों ने मथियाझागन, बुशी आनंद और सीटीआर निर्मल कुमार को चेतावनी दी थी कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो रही है। इससे दम घुटने और चोट लगने का खतरा हो सकता है, लेकिन चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया गया।

पुलिस की मदद के बाद भी भीड़ कंट्रोल नहीं कर सके टीवीके नेता

रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस की मदद के बाद भी टीवीके नेता भीड़ कंट्रोल नहीं कर सके। लोग पेड़ों और सड़क किनारे बने अस्थायी आश्रयों पर चढ़ गए। वजन अधिक होने के कारण वे ढह गए, जिससे नीचे खड़े लोग फंस गए और दम घुटने लगा। टीवीके को दोपहर 3 बजे से रात 10 बजे के बीच सभा करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन विजय ज्यादा भीड़ दिखाने के इरादे से देर से आए।

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FIR में TVK के तीन सीनियर नेताओं जिला सचिव मथियाझागन, राज्य महासचिव बुशी आनंद और राज्य संयुक्त सचिव सीटीआर निर्मल कुमार के नाम हैं। इन पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) अधिनियम की धारा 105, 110, 125 (बी) और 223 के साथ-साथ तमिलनाडु सार्वजनिक संपत्ति अधिनियम की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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