Abhijeet Dipke Bail : सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके को जमानत मिल गई है। नेता सौरव दास और आशुतोष रांका प्रदर्शन के आरोप में तिहाड़ जेल में हैं। वे चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। मामले की अगली सुनवाई 19 अक्टूबर को होगी।
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को शनिवार को जमानत मिल गई है, लेकिन पार्टी के दो नेता सौरव दास और आशुतोष रांका अभी तिहाड़ जेल में बंद हैं। दोनों को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था। अदालत ने उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। अब दोनों की रिहाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि वे जेल से कब बाहर आएंगे और उन पर क्या आरोप लगाए गए हैं।
अभिजीत दीपके को कैसे मिली जमानत?
अभिजीत दीपके को शुक्रवार, 16 अक्टूबर की देर रात दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। वह कनॉट प्लेस में होने वाली ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली में शामिल होने जा रहे थे। पुलिस ने इस रैली की अनुमति नहीं दी थी। शनिवार को उन्हें विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां शांति बनाए रखने की शर्त पर उन्हें जमानत मिल गई। इसके लिए उन्हें शांति बनाए रखने से जुड़ा बॉन्ड भी भरना पड़ा।
सौरव दास और आशुतोष रांका पर क्या हैं आरोप?
- सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली पुलिस का आरोप है कि दोनों अपने समर्थकों के साथ जंतर-मंतर के उस हिस्से में पहुंचे, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में तय नहीं किया गया था। पुलिस के मुताबिक, उन्होंने बैरिकेड पार किए, नारे लगाए और लोगों को प्रदर्शन के लिए जुटाने की कोशिश की।
- पुलिस ने यह भी कहा कि दोनों ने पहले शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरा था, लेकिन रिहाई के बाद दोबारा प्रदर्शन की अपील की। इसी आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
तिहाड़ जेल में कहां रखे गए हैं दोनों नेता?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सौरव दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल में अलग-अलग हाई सिक्योरिटी वार्ड में रखा गया है। दोनों की निगरानी के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है। जेल प्रशासन ने उनकी दूसरे कैदियों से मुलाकात की मांग भी स्वीकार नहीं की।
आखिर कब आएंगे जेल से बाहर?
अदालत के आदेश के मुताबिक, दोनों को 19 अक्टूबर को आगे की सुनवाई के लिए पेश किया जाना है। पांच दिन की न्यायिक हिरासत की अवधि पूरी होने के बाद अदालत उनकी स्थिति पर आगे फैसला ले सकती है। हालांकि, 19 अक्टूबर को ही उनकी रिहाई हो जाएगी, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। जमानत मिलने या हिरासत आगे बढ़ाने का फैसला अदालत की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
क्या है पूरा राजनीतिक मामला?
- कॉकरोच जनता पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कई मतदाताओं के नाम हटाए गए। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी ने दिल्ली में प्रदर्शन की योजना बनाई थी। पुलिस ने कानून-व्यवस्था और अनुमति से जुड़े कारणों का हवाला देकर प्रदर्शन पर कार्रवाई की।
- फिलहाल अभिजीत दीपके को जमानत मिल चुकी है, लेकिन सौरव दास और आशुतोष रांका के मामले में अगला फैसला अदालत की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।








