शीश महल' से गेस्ट हाउस तक का सफर! जिस बंगले पर हुआ था सियासी घमासान, अब वहीं बनेगा स्टेट गेस्ट हाउस। अरविंद केजरीवाल का 6 फ्लैगस्टाफ रोड वाला बंगला अब बदलेगा रूप, जानिए विवादित घर को लेकर सरकार का बड़ा प्लान।
Arvind Kejriwal Sheesh Mahal: दिल्ली की राजनीति का वो सबसे चर्चित और रहस्यमयी पता—6 फ्लैगस्टाफ रोड। यह वही बंगला है जिसने एक दशक तक दिल्ली की सत्ता के सबसे बड़े फैसलों को अपनी दीवारों के भीतर कैद रखा। साल 2015 से लेकर लगभग दस सालों तक इस बंगले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी पूरी ताकत के साथ रहे। लेकिन समय का पहिया ऐसा घूमा कि आरोपों और सियासी घमासान के बीच यह बंगला अक्टूबर 2024 में खाली हो गया। महीनों से सूने पड़े और रहस्य के घेरे में लिपटे इस वीरान बंगले को लेकर अब दिल्ली सरकार के गलियारों से एक ऐसी खबर आई है, जिसने राजनीतिक पंडितों को भी चौंका दिया है।

'शीश महल' का नया अवतार: क्या मिट पाएंगे करोड़ों की विलासिता के निशान?
विपक्ष जिस बंगले को भ्रष्टाचार का प्रतीक बताकर 'शीश महल' कहता था, अब उसे हमेशा-हमेशा के लिए एक स्टेट गेस्ट हाउस और कल्चरल सेंटर में तब्दील करने का फैसला लिया गया है। दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस बंगले को चमचमाती आधुनिक सुविधाओं, विशाल पार्किंग स्पेस और एक आलीशान वेटिंग हॉल के साथ फिर से विकसित किया जा रहा है। अब इस जगह पर कोई मुख्यमंत्री या राजनेता स्थाई तौर पर नहीं रहेगा, बल्कि भारत और दुनिया भर से आने वाले वीवीआईपी (VVIP) मंत्रियों, आधिकारिक प्रतिनिधिमंडलों, खास मेहमानों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के ठहरने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाएगा, जिसके लिए बाकायदा शुल्क भी वसूला जाएगा।
सस्पेंस की वो रात... जब 7 करोड़ का बजट अचानक बन गया 33 करोड़!
आखिर इस बंगले को लेकर इतना बवाल क्यों था? इस सस्पेंस से पर्दा तब उठा जब भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक बेहद गोपनीय और सनसनीखेज रिपोर्ट दिल्ली विधानसभा के पटल पर पेश की गई। रिपोर्ट के आंकड़ों ने सबको सुन्न कर दिया। साल 2020 में जब इस बंगले के नवीनीकरण (रेनोवेशन) का ठेका दिया गया, तब शुरुआती अनुमान महज 7.91 करोड़ रुपये था। लेकिन जैसे ही लोक निर्माण विभाग (PWD) ने 2022 में अपना काम पूरा किया, तो इसकी फाइल पर दर्ज कुल लागत बढ़कर 33.66 करोड़ रुपये हो चुकी थी—यानी मूल अनुमान से 340% से भी ज़्यादा की भारी-भरकम बढ़ोतरी!
'एंटीक और सजावटी' चीज़ों का सीक्रेट: दीवारों के पीछे छिपे थे 19 करोड़ के राज़
CAG की जांच रिपोर्ट में एक और सबसे हैरान करने वाला खुलासा हुआ। कुल 33 करोड़ रुपये की भारी राशि में से लगभग 18.88 करोड़ रुपये सिर्फ और सिर्फ "बेहतर स्पेसिफिकेशन, कलात्मक, एंटीक और सजावटी" चीज़ों को खरीदने और लगाने में फूंक दिए गए थे। इतना ही नहीं, इस रेनोवेशन के चक्कर में परिसर का बिल्ट-अप एरिया (निर्मित क्षेत्र) एक-तिहाई से ज़्यादा बढ़कर 1,397 वर्ग मीटर से सीधे 1,905 वर्ग मीटर हो गया था। बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाकर विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान इसके छोटे-छोटे मॉडल जनता के बीच घुमाए और इसे 'शीश महल' का नाम देकर सीधे भ्रष्टाचार के संगीन आरोप जड़े।
10 कर्मचारियों का 'अदृश्य' पहरा: खाली बंगले में रोज़ क्यों चल रहे हैं AC?
बंगला भले ही खाली हो चुका है, लेकिन इसके भीतर का सस्पेंस अब भी बरकरार है। सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल इस आलीशान परिसर की देखभाल के लिए 10 से ज़्यादा विशेष कर्मचारी चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं। ये कर्मचारी न सिर्फ रोज़ाना झाड़ू-पोछा और डस्टिंग करते हैं, बल्कि बंगले के भीतर लगे महंगे रेफ्रिजरेटर और दर्जनों एयर कंडीशनर (AC) जैसे बिजली के उपकरणों को सुचारू रूप से चलाने का काम करते हैं ताकि वे खराब न हों। मानो बंगला आज भी अपने किसी खास मेहमान के स्वागत के लिए पलकें बिछाए खड़ा हो।
लुटियंस दिल्ली के नए ठिकाने: कहां छिपे हैं अब 'आप' के मुखिया?
इस चौतरफा राजनीतिक घेराबंदी और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के बाद अरविंद केजरीवाल को यह बंगला मजबूरी में छोड़ना पड़ा था। इसके बाद सियासत का यह सबसे बड़ा चेहरा कुछ समय के लिए मंडी हाउस के पास 5 फ़िरोज़शाह रोड पर पार्टी के पूर्व सांसद अशोक मित्तल के सरकारी बंगले में शरण लेने पहुंचा। लेकिन सस्पेंस यहीं खत्म नहीं हुआ; केजरीवाल अब पूरी तरह से लुटियंस दिल्ली के एक अति-सुरक्षित इलाके 95, लोधी एस्टेट वाले घर में शिफ्ट हो चुके हैं, जो कि टाइप-VII श्रेणी का एक बेहद वीआईपी सरकारी बंगला है। अब देखना यह है कि इस 'शीश महल' के गेस्ट हाउस बनने के बाद क्या दिल्ली की राजनीति का यह जिन्न हमेशा के लिए शांत हो पाएगा?

