बेंगलुरु में एक परिवार 6 घंटे तक साइबर ठगों के 'डिजिटल अरेस्ट' में फंसा रहा। मनी लॉन्ड्रिंग का झूठा आरोप लगाकर उन्हें धमकाया गया। बेटे की सूझबूझ ने स्कैम को पहचानकर परिवार को एक बड़ी धोखाधड़ी से बचा लिया।

बेंगलुरु : बेंगलुरु में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां 'कन्नड़प्रभ' के एक कर्मचारी और उनका परिवार करीब 6 घंटे तक साइबर ठगों के 'डिजिटल अरेस्ट' में फंसा रहा। मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर ठग उनसे पैसे ऐंठना चाहते थे, लेकिन उनके बेटे की समझदारी ने पूरे परिवार को एक बड़ी धोखाधड़ी से बचा लिया। यह घटना येलहंका उपनगर के चौथे फेज में रहने वाले घनश्याम दास प्रभु के साथ हुई। घनश्याम 'कन्नड़प्रभ' के विज्ञापन विभाग में मैनेजर हैं। उनकी पत्नी का नाम ज्योति है। उनके बेटे अभिषेक प्रभु की साइबर फ्रॉड को लेकर जागरूकता ने ही अपने माता-पिता को इस बड़ी मुसीबत से बचाया।

पुलिस की वर्दी पहनकर दी धमकी

पुलिस की वर्दी पहने एक शख्स ने घनश्याम को वीडियो कॉल पर धमकाया। उसने कहा कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच चल रही है। ठग ने वॉट्सऐप पर जांच के ऑर्डर की कॉपी भेजकर उन्हें और डरा दिया। घनश्याम ने फौरन इसकी जानकारी अपने बेटे अभिषेक को दी, जो एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। अभिषेक ने डॉक्यूमेंट्स देखते ही समझ लिया कि यह एक 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम है। उन्होंने तुरंत अपने पिता को कोई भी बैंक डिटेल न देने की सलाह दी। जब घनश्याम ने ठगों को कोई जानकारी नहीं दी, तो अभिषेक ने घर आकर खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने ठग से बात की और पुलिस में शिकायत करने की धमकी दी, जिसके बाद ठग ने कॉल काट दिया।

कैसे बिछाया ठगी का जाल?

बुधवार दोपहर करीब 12:45 बजे घनश्याम को एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉलर ने खुद को टेलीकॉम कंपनी का कर्मचारी बताया और कहा कि आपके खिलाफ वित्तीय धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ है और पुलिस आपसे पूछताछ करेगी। थोड़ी देर बाद, पुलिस की वर्दी पहने एक शख्स ने उन्हें वॉट्सऐप (9479148514) पर वीडियो कॉल किया। उसने खुद को नवी मुंबई थाने का एसीपी बताया।

ठग ने आरोप लगाया कि 'आपके ऊपर विदेश में 38 करोड़ रुपये अवैध रूप से ट्रांसफर करने का आरोप है। जांच में पता चला है कि यह काम केनरा बैंक के एटीएम से हुआ है।' यह सुनकर घनश्याम घबरा गए। ठग ने उन्हें कॉल काटने से मना कर दिया और वॉट्सऐप पर सीबीआई और मुंबई पुलिस के नाम वाले फर्जी दस्तावेज भेजे।

इससे घनश्याम और डर गए। ठग ने उनसे उनकी पर्सनल और प्रोफेशनल जानकारी ले ली। इसी बीच, ठग ने घनश्याम की पत्नी ज्योति को भी घर से बाहर न जाने की धमकी दी। जब ज्योति ने अपनी तबीयत खराब होने की बात कही, तो ठग ने उन्हें कमरे में खाना खाकर आराम करने की 'इजाजत' दी।

टॉयलेट के बहाने बेटे को किया मैसेज

कुछ देर बाद, घनश्याम ने टॉयलेट जाने का बहाना बनाया और चुपके से अपने बेटे अभिषेक को वॉट्सऐप पर मैसेज भेजकर पूरी स्थिति बताई। मैसेज पढ़ते ही अभिषेक अलर्ट हो गए। उन्होंने सीबीआई और मुंबई पुलिस के नाम पर भेजे गए ऑर्डर को चेक किया और समझ गए कि यह 'डिजिटल अरेस्ट' है। उन्होंने तुरंत पिता को मैसेज किया कि किसी भी हालत में बैंक अकाउंट की जानकारी न दें।

इसके बाद जब ठग ने बैंक डिटेल्स मांगी, तो घनश्याम ने कहा कि उन्हें अपने और पत्नी के बैंक खातों की जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया, 'मैं कन्नड़प्रभ अखबार में काम करता हूं। मेरे दोनों बैंक खातों की पासबुक ऑफिस में हैं और पत्नी की पासबुक बेटे के पास है।'

शाम को जब अभिषेक घर लौटे, तो ठग अभी भी वीडियो कॉल पर था। अभिषेक ने उससे सीधे बात की और पूछा कि उनके पिता 38 करोड़ का ट्रांसफर कैसे कर सकते हैं। जब अभिषेक ने स्थानीय पुलिस को बुलाने की धमकी दी, तो ठग ने कहा, 'इसका स्थानीय पुलिस से कोई लेना-देना नहीं है, आप शिकायत नहीं कर सकते।' लेकिन अभिषेक डरे नहीं और सवाल पूछते रहे, जिसके बाद ठग ने घबराकर कॉल काट दिया।