बिहार के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के बाद सरकार ने परिवार को आर्थिक मदद और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का फैसला किया है। मामले में 31 जुलाई को एक पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी भी हुई थी।
Bharat Tiwari Encounter Case: बिहार के भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी की मौत से जुड़े एनकाउंटर मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। मामले की जांच के लिए गठित आयोग ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट के बाद बिहार सरकार ने दिवंगत भरत तिवारी के परिवार के लिए आर्थिक सहायता और एक परिजन को सरकारी नौकरी देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी है। हालांकि, आयोग की अंतरिम रिपोर्ट में सामने आए सभी तथ्यों और सुझावों का विस्तृत आधिकारिक विवरण अभी सार्वजनिक रूप से सामने आना बाकी है।
जांच रिपोर्ट के बाद सरकार ने लिया फैसला
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मुताबिक, न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर सरकार भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता देगी। इसके अलावा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का भी फैसला किया गया है।
इससे पहले 24 जुलाई को मुख्यमंत्री ने भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात की थी। उस दौरान उन्होंने परिवार को मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय का भरोसा दिलाया था। मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर परिवार के साथ तस्वीर साझा करते हुए कहा था कि दिवंगत भरत तिवारी के परिवार को न्याय मिलेगा। सरकार के ताजा फैसले को जांच प्रक्रिया के बीच पीड़ित परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, मुआवजे और सरकारी नौकरी से जुड़ी औपचारिक प्रक्रिया और पात्रता की विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
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31 जुलाई को पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में जांच के दौरान 31 जुलाई को एक पुलिसकर्मी को गिरफ्तार भी किया गया था। आरा के पुलिस अधीक्षक राज ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया था कि मामले में शामिल पुलिसकर्मी अक्षय को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई आरा पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स यानी STF की संयुक्त टीम ने की। आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है और मामले की जांच कानून के अनुसार की जा रही है।
इस गिरफ्तारी ने मामले को और गंभीर बना दिया है, क्योंकि अब जांच का दायरा केवल एनकाउंटर की परिस्थितियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें पुलिसकर्मियों की कथित भूमिका और कार्रवाई की वैधता भी जांच के दायरे में है।
17 जून को हुई थी भरत भूषण तिवारी की मौत
भरत भूषण तिवारी की मौत 17 जून 2026 को बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में पुलिस ऑपरेशन के दौरान हुई थी। पुलिस का दावा था कि तिवारी ने अवैध हथियार से पुलिस टीम पर हमला किया था। पुलिस के अनुसार, जवाबी कार्रवाई में आत्मरक्षा के दौरान गोली चली और तिवारी की मौत हो गई। हालांकि, भरत तिवारी के परिवार और कुछ ग्रामीणों ने पुलिस के इस दावे पर सवाल उठाए थे। परिवार की ओर से इसे कथित तौर पर फेक एनकाउंटर बताया गया था और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग उठी थी।
अब न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के बाद सरकार द्वारा आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी देने का फैसला मामले में एक अहम घटनाक्रम है। आगे आयोग की अंतिम रिपोर्ट, जांच में सामने आने वाले तथ्य और कानूनी कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि 17 जून की घटना में वास्तव में क्या हुआ था और जिम्मेदारी किसकी तय होती है।
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