चीन ने म्यांमार सीमा पर ऑनलाइन धोखाधड़ी चलाने वाले मिंग परिवार के 11 लोगों को फांसी दी। ये लोग कॉल सेंटरों में चीनी मजदूरों को गुलाम बनाकर करोड़ों की ठगी करते थे। चीन की कार्रवाई के बाद अब ये गिरोह कंबोडिया और थाईलैंड में सक्रिय हो गए हैं।

चीनः औरत-मर्द मिलाकर 11 लोग लाइन में खड़े हैं। हर किसी के सिर के ऊपर फांसी का फंदा है। एक सीटी बजी और अगले ही पल, 11 लोगों को एक साथ फांसी पर लटका दिया गया। हाल ही में चीन में इन 11 लोगों को एक साथ फांसी दी गई। ये कोई आम लोग नहीं थे, बल्कि बड़े कारोबारी घरानों के सदस्य और करोड़पति थे। ये लोग चीन की सीमा के पास ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए फैक्ट्री की तरह कॉल सेंटर चलाते थे। यहां हजारों लोगों से गुलामों की तरह काम कराया जाता था और इस तरह करोड़ों कमाए जाते थे।

कौन थे वो 11 लोग, जिन्हें चीन ने दे दी फांसी

ये 11 लोग कौन थे? यह जानने के लिए आपको म्यांमार के लौक्काइंग शहर के बारे में जानना होगा। यह शहर चीन की सीमा पर है और दुनिया में ऑनलाइन धोखाधड़ी का केंद्र माना जाता है। यहां चार परिवार राज करते हैं - मिंग, बाओ, वेई और लियू। चीन ने जिन लोगों को फांसी दी है, वे मिंग परिवार के थे।

इन परिवारों को 2001 के बाद शहर पर कब्ज़ा मिला। उससे पहले, इस इलाके पर MNDAA नाम की एक आदिवासी सेना का कंट्रोल था। 2000 में म्यांमार में तख्तापलट हुआ और जनरल मिन आंग ने सत्ता हथिया ली। जनरल मिन ने आदिवासी सेना को खदेड़कर यह शहर अपने करीबी चार परिवारों को सौंप दिया। उन्होंने यहां कैसीनो, ऑनलाइन स्कैम सेंटर, ड्रग्स नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे कई गोरखधंधे शुरू कर दिए।

पूरे लौक्काइंग में इनके कॉल सेंटर फैले हुए हैं, जहां चीनी मजदूरों से काम लिया जाता है। उन्हें मोटी तनख्वाह का लालच देकर लाया जाता है और फिर गुलाम बनाकर काम कराया जाता है। बाहर बंदूक लिए गार्ड पहरा देते हैं, जिससे कोई भाग न सके। भागने की कोशिश करने वालों को या तो बेरहमी से तड़पाया जाता है या फिर मार दिया जाता है। इस जाल में फंसे लोगों की कहानियां चीनी सोशल मीडिया पर वायरल हैं।

क्राउचिंग टाइगर विला नाम का स्कैम चलाता था कुख्यात

हाल ही में फांसी पर लटकाया गया मिंग परिवार 'क्राउचिंग टाइगर विला' नाम का एक स्कैम सेंटर चलाता था, जो यहां का सबसे कुख्यात अड्डा था। 2023 में, यहां से भागने की एक कोशिश हुई, जिसमें गार्डों ने करीब सौ चीनी मजदूरों को गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना से चीन में हड़कंप मच गया, जिसके बाद चीन ने इनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की। इसके लिए उन्होंने पुरानी आदिवासी सेना MNDAA को वापस बुलाया। सेना ने शहर पर फिर से कब्जा कर लिया और धोखाधड़ी के ठिकानों को नष्ट कर दिया। चारों परिवारों के 60 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार करके चीन लाया गया और फंसे हुए चीनी मजदूरों को भी वापस लाया गया।

जब इन सरगनाओं से पूछताछ हुई तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं। उनमें से एक ने कहा कि वे बोरियत मिटाने के लिए लोगों को गोली मार दिया करते थे। चीन ने मजदूरों पर होने वाले अत्याचार और ऑनलाइन धोखाधड़ी की कहानियां दुनिया के सामने रखीं। इसके बाद ही मिंग परिवार के 11 लोगों को फांसी दी गई। बाकी तीन परिवारों के लोग भी मौत की सज़ा का इंतज़ार कर रहे हैं।

लेकिन, यह मत सोचिए कि ऑनलाइन धोखाधड़ी के अड्डे खत्म हो गए हैं। इन गिरोहों ने अब कंबोडिया और थाईलैंड को अपना नया ठिकाना बना लिया है। जब थाई-म्यांमार सीमा पर मुख्य घोटाले के केंद्र बंद हुए, तो इन माफिया गिरोहों ने म्यांमार के नए इलाकों में अपने अड्डे बना लिए हैं।