PG Safety in Delhi : दिल्ली के सत्य निकेतन में PG की बिल्डिंग गिरने से 7 लोगों की मौत हो गई। इस हादसे ने दिल्ली-NCR के PG में रहने वाले स्टूडेंट्स और युवाओं को डरा दिया है। अब वे सवाल उठा रहे हैं कि जिस जगह को वे अपना दूसरा घर समझते हैं, वो कितनी सुरक्षित है। इस बीच, दिल्ली सरकार PG के लिए नई पॉलिसी लाने की तैयारी कर रही है।

नई दिल्ली : अपने सपनों को पूरा करने के लिए जो स्टूडेंट्स और युवा अपना शहर छोड़कर दिल्ली आते हैं, उनके लिए पेइंग गेस्ट (PG) सिर्फ चार दीवारों वाला कमरा नहीं होता। धीरे-धीरे यह उनका दूसरा घर बन जाता है, जहां वे कॉलेज या काम के बाद लौटते हैं, खाना खाते हैं, एग्जाम की तैयारी करते हैं, देर रात की मीटिंग्स अटेंड करते हैं और सोने से पहले अपने परिवार को फोन करते हैं। लेकिन 6 सितंबर को दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन में लड़कों के एक PG की पांच मंजिला इमारत ढह गई। इस हादसे में सात लोगों की जान चली गई। इस घटना ने उस भरोसे को हिलाकर रख दिया है और कई लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जिस जगह को वे घर कहते हैं, क्या वह वाकई में सुरक्षित है।

खौफ में हैं दिल्ली-NCR के PG स्टूडेंट्स

  • दिल्ली-NCR के PG में रह रहे स्टूडेंट्स और नौकरीपेशा युवाओं के मन में अब एक ऐसा सवाल उठ रहा है, जिसके बारे में उन्होंने पहले कभी नहीं सोचा था: जिस बिल्डिंग में मैं सोता हूं, क्या मुझे पता है कि वह कितनी सेफ है?
  • अब तक, PG चुनते वक्त किराया, खाना, वाई-फाई और कॉलेज या ऑफिस से दूरी जैसी बातें ही देखी जाती थीं। बिल्डिंग की हालत कैसी है, उसके पास परमिशन है या नहीं, या इमरजेंसी में क्या होगा, इन सब पर शायद ही किसी का ध्यान जाता था।

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झारखंड के देवघर से दिल्ली आई स्नेहा भी सदमे में

  • स्नेहा मिश्रा संत नगर के 'न्यू पीजी फॉर गर्ल्स' में रहती हैं। वह झारखंड के देवघर से दिल्ली आई हैं। स्नेहा ने बताया, “जब मैं देवघर से दिल्ली आई, तो यह PG मेरा दूसरा घर बन गया। मैं यहीं खाती, पढ़ती और सोती हूं, लेकिन मैंने कभी यह नहीं सोचा कि जिस जगह को मैं घर कहती हूं, वह असल में सेफ है भी या नहीं।”उन्होंने कहा कि अब तो सोते वक्त भी यह ख्याल दिमाग से नहीं जाता।
  • स्नेहा ने बताया, “पहले मैंने कभी बिल्डिंग की हालत के बारे में नहीं सोचा। अब जब मैं सोने जाती हूं, तो मेरे मन में एक सवाल होता है - क्या होगा अगर जिस बिल्डिंग पर हम अपनी जान का भरोसा कर रहे हैं, वही सेफ न हो?”

स्टूडेंट ही नहीं माता-पिता को भी यह लगने लगा डर

  • यह चिंता सिर्फ इन बिल्डिंग्स में रहने वाले युवाओं तक ही सीमित नहीं है। यह उनके घर तक भी पहुंचती है, उन माता-पिता तक जो अपने बच्चों को यह मानकर दिल्ली भेजते हैं कि उन्हें रहने के लिए एक सुरक्षित जगह मिल गई है।
  • स्नेहा ने ANI को बताया, “हमारे माता-पिता हमें यहां यह सोचकर भेजते हैं कि हम सुरक्षित हैं। सत्य निकेतन के बाद, हम में से कई लोग अपने सिर पर मौजूद छत को अब अलग नजर से देखने लगे हैं।”

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नोएडा की वर्किंग वुमन का क्या कहना

  • नोएडा के एक PG में रहने वाली शिल्पश्री मोंडल ने बताया कि उनका बजट उन्हें ज्यादा ऑप्शन नहीं देता।
  • मोंडल ने ANI को बताया, “मुझे नहीं लगता कि मेरे जैसी वर्किंग वुमन के पास भी रहने की जगह चुनने के लिए कोई खास चॉइस है। ज्यादातर फैसला बजट ही करता है, खासकर दिल्ली जैसे शहर में, जहां एक सेफ और सस्ता ठिकाना मिलना मुश्किल हो सकता है।”
    सत्य निकेतन हादसे ने पहले तो शिल्पश्री को डरा दिया। लेकिन जल्द ही यह डर उनकी अपनी रहने की जगह पर एक करीबी नजर में बदल गया।
  • उन्होंने कहा, “मैं सोचने लगी, अगर मेरे PG में ऐसा कुछ हो गया तो? मैंने किसी तरह खुद को यकीन दिलाया कि ऐसा नहीं होगा, लेकिन यहां पहले से ही कुछ चीजें हैं जो मुझे परेशान करती हैं, जैसे पानी की सप्लाई में दिक्कत, खराब साफ-सफाई और दीवारों में सीलन।”

हल्द्वानी की पल्लवी 2 साल से PG में रहतीं

  • उत्तराखंड के हल्द्वानी की रहने वाली पल्लवी जोशी करीब दो साल से दिल्ली के एक PG में रह रही हैं। इस हादसे ने उनके लिए रात की एक सामान्य आदत को बदल दिया है।
  • जोशी ने ANI को बताया, “मैंने पहले कभी अपने PG के स्ट्रक्चर के बारे में नहीं सोचा था। सत्य निकेतन के बाद, मैंने यह नोटिस करना शुरू कर दिया है कि मेरी बिल्डिंग कैसे डिजाइन की गई है और क्या यहां सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम हैं। रात में भी, मैं कभी-कभी सोचती हूं कि अगर यहां कुछ गलत हो गया तो क्या होगा।”
  • जोशी ने ANI को बताया कि न तो उनके PG मालिक और न ही मैनेजमेंट से किसी ने इस घटना के बाद यहां रहने वालों से बात की, न ही उनकी चिंताओं को दूर करने या बिल्डिंग की सेफ्टी का भरोसा दिलाने की कोशिश की।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के विजय राय को भी डर

  • दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामानुजन कॉलेज की स्टूडेंट विजया रॉय CAT एग्जाम की तैयारी कर रही हैं। उनके लिए अनिश्चितता इस बात से शुरू होती है कि क्या उनके PG के पास जरूरी परमिशन हैं भी या नहीं।
  • उन्होंने ANI को बताया कि उनके PG में करीब 20 से 25 लोग रहते हैं, लेकिन रहने वालों को यह नहीं बताया जाता कि प्रॉपर्टी के पास जरूरी अप्रूवल हैं या नहीं।
  • रॉय ने ANI को बताया, “हमें तो यह भी नहीं पता कि उनके पास दिल्ली नगर निगम (MCD) से परमिशन है या नहीं। जब हम पहली बार PG में आते हैं, तो वे हमसे डॉक्यूमेंट्स मांगते हैं, लेकिन वे हमें कोई कागज नहीं दिखाते।”
  • रॉय के लिए, जिस बिल्डिंग में छात्र हर रात सोने जा रहे हैं, उसकी सुरक्षा के लिए उन्हें सिर्फ मालिक की बातों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
  • उन्होंने ANI को बताया, “अगर कॉलेजों में हॉस्टल की पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हों, तो स्टूडेंट्स के पास एक और ऑप्शन होगा। PG मालिकों का एकाधिकार (monopoly) नहीं रहेगा और शायद वे हालात सुधारने पर मजबूर होंगे।”

सत्य निकेतन हादसे ने बदल दिया नजरिया

  • इन स्टूडेंट्स और युवा प्रोफेशनल्स के लिए, सत्य निकेतन का हादसा अब सिर्फ टीवी स्क्रीन पर देखी गई एक खबर नहीं है। इसने उनके अपने कमरों को देखने का नजरिया बदल दिया है - दीवार पर सीलन का धब्बा, जुगाड़ से बना पार्टीशन, भीड़ भरी सीढ़ियां या उनके बिस्तर के ऊपर की छत।
  • स्टूडेंट्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, दिल्ली सरकार राष्ट्रीय राजधानी में पेइंग गेस्ट (PG) को रेगुलेट करने के लिए एक व्यापक पॉलिसी पर काम कर रही है। शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने सुरक्षा, संरक्षा और किराए को रेगुलेट करने के लिए कई प्रस्तावित उपायों की जानकारी दी है।