क्या ईरान-अमेरिका सीज़फायर के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य में लौट रही है शांति? क्या यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा मोड़ साबित होगा? संघर्ष के बीच फंसे जहाज़ों का क्या हुआ? क्या होर्मुज़ संकट खत्म हो गया या खतरा अभी बाकी है? रणनीतिक जलमार्ग पर भारत की नजर लगातार बनी हुई है। जानिए पूरी कहानी। 

India LNG Carrier Hormuz Strait Crossing: पश्चिम एशिया (Middle East) में पिछले साढ़े तीन महीने से जारी भीषण युद्ध और बारूदी दौर के बीच भारत के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी ऐतिहासिक कामयाबी सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए शुरुआती सीज़फ़ायर (युद्धविराम) समझौते के तुरंत बाद, 'LNG कैरियर दिशा' नाम के विशालकाय भारतीय जहाज़ ने दुनिया के सबसे खतरनाक और रणनीतिक रूप से संवेदनशील 'होर्मुज़ जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। यह कदम इसलिए बेहद चौंकाने वाला है क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद से इस रूट पर कमर्शियल जहाजों की आवाजाही पूरी तरह ठप थी। यह टैंकर गुजरात के दहेज टर्मिनल के लिए रवाना हो चुका है, जिसने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चल रही सांसों को एक नई जिंदगी दे दी है।

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कतर की 'फोर्स मेज्योर' और भारत की आधी जरूरत पर संकट: क्यों थम गई थीं देश की धड़कनें?

आखिरकार इस एक भारतीय जहाज के सुरक्षित निकलने पर पूरी सरकार और उद्योग जगत क्यों जश्न मना रहा है? इसका जवाब भारत की ऊर्जा निर्भरता में छिपा है। भारत अपनी जरूरत की लगभग आधी नेचुरल गैस (LNG) विदेशों से आयात करता है, जिसका तकरीबन 65 फीसदी हिस्सा कतर जैसे खाड़ी देशों से इसी होर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते भारत आता है। 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर घातक सैन्य हमले किए थे, तब जवाबी कार्रवाई में तेहरान ने इस रूट को बंद कर दिया था। हालात इतने बदतर हो गए थे कि कतर ने भारत सहित दुनिया भर के खरीदारों को गैस देने के मामले में 'फोर्स मेज्योर' (अप्रत्याशित आपातकाल) की घोषणा कर दी थी, जिससे भारत में गैस और बिजली संकट का खतरा मंडराने लगा था।

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'मिशन दहेज' पर 62,370 टन बारूदी ईंधन: 18 जून को गुजरात के तट पर मचेगी हलचल

'शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया' (SCI) के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम द्वारा प्रबंधित और 'पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड' द्वारा किराए पर लिया गया यह जहाज कोई सामान्य मालवाहक नहीं है। पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक उपेश कुमार शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि एलएनजी कैरियर 'दिशा' अपने साथ 62,370 मीट्रिक टन बेहद संवेदनशील लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का कार्गो लेकर आगे बढ़ रहा है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो आगामी 18 जून को यह जहाज गुजरात के दहेज टर्मिनल पर लंगर डालेगा। इस रूट के खुलने से अब बंद पड़ी भारतीय फैक्ट्रियों और गैस सप्लाई चेन को दोबारा रफ्तार मिलने की उम्मीद जगी है।

खाड़ी में फंसे 18,000 भारतीय नाविकों का रेस्क्यू: 'बोकेम मारेन्गो' कांड का सच आया सामने

मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से अब तक कुल 15 जहाजों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें 10 भारतीय झंडे वाले और 5 विदेशी जहाज शामिल हैं। लेकिन सस्पेंस अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हाल ही में हांगकांग के झंडे वाले तेल और केमिकल टैंकर 'बोकेम मारेन्गो' के साथ हुई रहस्यमयी घटना पर से पर्दा उठाते हुए निदेशक शर्मा ने साफ किया कि जहाज पर मौजूद सभी भारतीय क्रू मेंबर्स पूरी तरह सुरक्षित हैं। वर्तमान में खाड़ी के अशांत इलाकों में करीब 18,000 भारतीय नाविक अपनी जान हथेली पर रखकर काम कर रहे हैं, जिनकी सुरक्षा के लिए सरकार ने 24 घंटे चलने वाली आपातकालीन हेल्पलाइन शुरू की है, जिसकी मदद से अब तक 3,500 से ज्यादा नाविकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

युद्ध के मुहाने पर 13 भारतीय युद्धपोत जैसे जहाज: शिपिंग महानिदेशालय का कड़ा अल्टीमेटम

हालांकि सीजफायर के बाद जहाजों की आवाजाही शुरू हो गई है, लेकिन समंदर के नीचे छिपा खतरा अब भी बरकरार है। अभी भी करीब 325 भारतीय नाविक होर्मुज जलडमरूमध्य के ठीक पश्चिम में भारतीय झंडे वाले जहाजों पर तैनात हैं और इस डेंजर जोन में भारत के 13 जहाज मौजूद हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत के शिपिंग महानिदेशालय ने सभी समुद्री कंपनियों और भर्ती एजेंसियों को एक कड़ा अल्टीमेटम जारी किया है। सरकार ने साफ कहा है कि इस संघर्ष वाले इलाके से गुजरते समय सुरक्षा से जुड़े नियमों का 100% सख्ती से पालन किया जाए। विदेश मंत्रालय और दुनिया भर में मौजूद भारतीय मिशन हर एक समुद्री लहर पर बारीकी से नजर रख रहे हैं ताकि 'दिशा' की तरह बाकी जहाजों को भी सुरक्षित वतन वापस लाया जा सके।