सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने आरोपों को खारिज करते हुए PoK में मानवाधिकार उल्लंघन और पाकिस्तान की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा जल सुरक्षा और संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर दिए गए बयान पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान के आरोप बेबुनियाद हैं और उनका उद्देश्य अपने आंतरिक संकटों से ध्यान भटकाना है।

पाकिस्तान के आरोपों को भारत ने किया खारिज
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से दिए जा रहे बयान वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में लंबे समय से जनता असंतोष जता रही है और वहां आर्थिक शोषण, नागरिक अधिकारों के उल्लंघन तथा प्रशासनिक दमन जैसे गंभीर मुद्दे मौजूद हैं।
भारत का कहना है कि इन समस्याओं के समाधान के बजाय पाकिस्तान सरकार विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए कठोर कदम उठा रही है। विदेश मंत्रालय ने इंटरनेट बंद करने, आवश्यक सेवाओं पर असर पड़ने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया।
सिंधु जल संधि पर भारत का रुख स्पष्ट
भारत ने दोहराया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को विश्वसनीय और स्थायी रूप से बंद नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि पर उसका वर्तमान रुख कायम रहेगा। विदेश मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि यदि पाकिस्तान की जल सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ तो वह इसे गंभीर मामला मानेगा और आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। उनके इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बहस और तेज हो गई है।
कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन पर भी भारत की आपत्ति
भारत ने सिंधु जल संधि के तहत गठित कथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के एक फैसले को भी स्वीकार करने से इनकार किया है। भारत का कहना है कि यह प्रक्रिया संधि की मूल भावना और स्थापित तंत्र के अनुरूप नहीं थी, इसलिए उसके निर्णय को मान्यता नहीं दी जा सकती।
पहलगाम हमले के बाद बदला समीकरण
भारत का कहना है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की समीक्षा की गई थी। इसी संदर्भ में सिंधु जल संधि को लेकर भी भारत ने अपने विकल्पों पर विचार किया। सरकार का स्पष्ट मत है कि आतंकवाद और द्विपक्षीय सहयोग एक साथ नहीं चल सकते।


