कर्नाटक के 36 रेलवे स्टेशनों पर FDA की छापेमारी में रसोई का बुरा हाल मिला। फंगस लगी सब्जियां, एक्सपायर दूध-दही और गंदगी पाई गई। 115 सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं और 28 वेंडरों को नोटिस जारी किया गया है।
अगर आप कर्नाटक में ट्रेन से सफर करते हैं और स्टेशन पर कुछ खाने-पीने का सोचते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। राज्य के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की एक औचक जांच में रेलवे स्टेशनों की रसोई का हाल बेहाल मिला है। जांच के दौरान टीमों को फंगस लगी सब्जियां, एक्सपायर हो चुका दूध और दही जैसी चीजें मिलीं, जिन्हें यात्रियों को बेचा जा रहा था।
यह कार्रवाई यात्रियों की तरफ से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद की गई। खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता विभाग के कमिश्नर के नेतृत्व में यह अभियान चलाया गया। विभाग की टीमों ने KSR बेंगलुरु, मैसूर, हुबली और कलबुर्गी समेत राज्य के 36 रेलवे स्टेशनों पर एक साथ छापेमारी की।
जांच में सामने आई चौंकाने वाली हकीकत
छापेमारी के दौरान जो कुछ मिला, वो हैरान करने वाला है। कई जगहों पर टमाटर और प्याज जैसी सब्जियों पर फंगस लगी हुई पाई गई। इसके अलावा, दूध, दही और पानी की बोतलें जैसी कई चीजें अपनी एक्सपायरी डेट पार कर चुकी थीं, फिर भी उन्हें बेचने के लिए रखा गया था।
रसोई में साफ-सफाई का भी बुरा हाल था। खाना बनाने वाले कई कर्मचारी बिना हेड कैप, दस्ताने और एप्रन के काम करते पाए गए, जो कि अनिवार्य नियम है। यही नहीं, कई वेंडरों के पास अपने कर्मचारियों का मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट तक नहीं था और खाने-पीने का सामान सीधे फर्श पर रखा हुआ मिला।
जांच अधिकारियों को यह भी शक है कि खाने में प्रतिबंधित आर्टिफिशियल रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा था। टीमों ने कुल 115 खाद्य सैंपल इकट्ठा किए हैं, जिन्हें जांच के लिए लैब में भेजा गया है। कई वेंडर्स तो खरीदे गए कच्चे माल का कोई बिल या इनवॉयस भी नहीं दिखा पाए।
वंदे भारत में सब ठीक, 28 वेंडरों पर गिरेगी गाज
इस पूरी कार्रवाई में एक राहत की बात यह रही कि वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक पाई गई। लेकिन बाकी जगहों पर मिली गंभीर खामियों के चलते 28 वेंडरों को नोटिस जारी किया गया है।
विभाग के कमिश्नर ने साफ किया है कि यह सिर्फ शुरुआत है। अब सभी 115 सैंपलों की लैब रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी सैंपल जांच में फेल होता है, तो संबंधित वेंडर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और मुकदमा चलाया जाएगा।


