कोलकाता के सोदेपुर में रिश्ता खत्म करने की जिद खूनी वारदात में बदल गई। पति ने बीच सड़क पत्नी की चाकू मारकर हत्या कर दी, फिर खुद पर हमला किया। घरेलू हिंसा और पुलिस जांच ने कई सवाल खड़े कर दिए।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के सोदेपुर इलाके से रोंगटे खड़े कर देने वाली एक ऐसी वारदात सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। एकतरफा जिद और घरेलू हिंसा के खूनी दलदल में फंसा एक रिश्ता बुधवार (8 जुलाई) की सुबह मौत के खौफनाक मोड़ पर जाकर खत्म हुआ। सोदेपुर की एक बेहद व्यस्त सड़क पर सबके सामने, एक 45 वर्षीय व्यक्ति ने अपनी ही पत्नी पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। इस खूनी खेल को रचने के बाद आरोपी ने खुद को भी खत्म करने की कोशिश की। इस रूह कँपाने वाले मंजर को देखकर तमाशबीन बने लोग बेबस खड़े रहे।
सरेराह तबाही: सुबह-सुबह बीच सड़क पर खिंचा खंजर, चीखों से दहला इलाका
यह खौफनाक वाकया बुधवार सुबह सोदेपुर के स्कूल रोड इलाके का है। आम दिनों की तरह सड़क पर लोगों की आवाजाही जारी थी, तभी अचानक चीख-पुकार मच गई। सोदेपुर के स्कूल रोड पर किराए के मकान में रहने वाले 45 वर्षीय सुभाष दास ने अपनी 40 वर्षीय पत्नी गीता दास को रास्ते में घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों के बीच कुछ ही सेकंड बात हुई और अचानक सुभाष ने अपनी जेब से धारदार चाकू निकालकर गीता पर हमला कर दिया। वह एक के बाद एक गीता के पेट और सीने पर वार करता गया। तमाशबीन बने पड़ोसियों और राहगीरों ने सुभाष को रोकने और उससे हथियार छीनने की कोशिश की, लेकिन सुभाष के सिर पर खून सवार था। वह किसी जंगली जानवर की तरह अपनी पत्नी को तब तक गोदता रहा जब तक कि वह सड़क पर खून से लथपथ होकर गिर नहीं गई।
“मैं यह रिश्ता खत्म करना चाहती हूँ...”आखिर क्यों हैवान बना पति?
इस भयावह हत्याकांड के पीछे की कहानी बेहद दर्दनाक और सस्पेंस से भरी है। स्थानीय लोगों के अनुसार, सुभाष और गीता ने कुछ साल पहले प्रेम विवाह किया था। गीता के मायके वाले इस शादी के सख्त खिलाफ थे, इसलिए दोनों अपने परिवार से दूर सोदेपुर में किराए पर रह रहे थे। लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही सुभाष का असली चेहरा सामने आ गया। वह गीता के साथ अक्सर बेरहमी से मारपीट करता था। गीता इस नर्क बन चुके रिश्ते से पूरी तरह तंग आ चुकी थी और उसने सुभाष से अलग होने (रिश्ता खत्म करने) का फैसला कर लिया था। लेकिन सुभाष को अपनी पत्नी का यह फैसला मंजूर नहीं था। उसकी सनक इस कदर बढ़ गई कि उसने ठान लिया कि अगर गीता उसकी होकर नहीं रहेगी, तो वह उसे जिंदा भी नहीं छोड़ेगा।

पुलिस डायरी और पड़ोसियों के वो खुलासे: जो टाल सकते थे यह कत्लेआम
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ यह है कि यह हिंसा अचानक नहीं हुई थी। स्थानीय निवासी तरुण कांति दास ने मीडिया को बताया कि इस जोड़े के बीच का विवाद कोई राज नहीं था, पूरा पड़ोस इससे वाकिफ था। तरुण ने बताया: "इन दोनों के बीच लंबे समय से झगड़ा चल रहा था। हमने कई बार स्थानीय पुलिस को भी इसकी लिखित जानकारी दी थी। अभी कुछ दिन पहले ही जब सुभाष ने गीता को बुरी तरह पीटा था, तब हम पड़ोसियों ने मिलकर उसे पकड़कर पुलिस के हवाले किया था।" लेकिन पुलिस की ढिलाई और सुभाष की बढ़ती सनक का नतीजा यह हुआ कि बुधवार की सुबह यह खूनी खेल सरेआम सड़क पर खेला गया। गीता की बेरहमी से हत्या करने के बाद, सुभाष ने उसी लहूलुहान चाकू से अपनी जान लेने की नियत से खुद पर भी कई वार किए और अपना गला रेतने की कोशिश की।
अस्पताल में आखिरी सांस और पुलिस की जांच: क्या बच पाएगी कातिल की जान?
वारदात के तुरंत बाद स्थानीय क्लब के अध्यक्ष और पड़ोसियों की मदद से दोनों को तुरंत नजदीकी सागर दत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने गीता को बचाने की पुरजोर कोशिश की, लेकिन शरीर से अत्यधिक खून बह जाने के कारण उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया। वहीं, अपनी जान लेने की कोशिश करने वाला आरोपी सुभाष दास अभी भी जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है और डॉक्टरों के मुताबिक उसकी हालत बेहद नाजुक है।
पुलिस ने शुरू की जांच, कई पहलुओं की पड़ताल
घटना की जानकारी मिलते ही बैरकपुर पुलिस कमिश्नरेट के डिप्टी पुलिस कमिशलर (DCP) कार्तिक चंद्र मंडल भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से सबूत इकट्ठा किए हैं। डीसीपी मंडल ने पुष्टि की है कि पुलिस ने इस मामले में हत्या का केस दर्ज कर लिया है और पड़ोसियों द्वारा बताए गए कुछ संदिग्ध नामों और पुलिस की पिछली शिकायतों के आधार पर तफ्तीश को आगे बढ़ाया जा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि समय रहते घरेलू हिंसा पर कड़े कदम न उठाए जाएं, तो अंजाम कितना भयानक हो सकता है।
घरेलू हिंसा के संकेतों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि यदि घरेलू हिंसा की शिकायतों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई न हो या पीड़ित को पर्याप्त सुरक्षा न मिले, तो हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि पहले मिली शिकायतों के बाद क्या-क्या कदम उठाए गए थे और क्या इस वारदात को रोका जा सकता था।


