पाकिस्तानी पत्रकार फ़रिहा फ़ारुख़ एक पॉडकास्ट में देसी खाने को 'ज़हर' कहने पर विवादों में हैं। उन्होंने बिरयानी और दाल-चावल जैसे पकवानों से नफ़रत जताई। उनके इस बयान पर भारत-पाकिस्तान में बहस छिड़ गई है।
पाकिस्तानी पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर फ़रिहा फ़ारुख़ एक पॉडकास्ट में अपनी बात रखने के बाद सोशल मीडिया पर बवाल का केंद्र बन गई हैं। उनके बयान पर ढेरों मीम्स, चुटकुले और बहस छिड़ गई है। यूट्यूबर अदील आसिफ़ के पॉडकास्ट में हुई उनकी बातचीत की क्लिप्स कुछ ही दिनों में पाकिस्तान और भारत में इंस्टाग्राम, फ़ेसबुक और एक्स पर वायरल हो गईं।

ये पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब फ़रिहा ने खाने को लेकर अपनी पसंद-नापसंद के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने दक्षिण एशिया के कई पसंदीदा पकवानों से अपनी नफ़रत ज़ाहिर की। उन्होंने बिरयानी, निहारी और दाल-चावल जैसे रोज़मर्रा के खाने को अपनी लाइफ़स्टाइल के लिए ठीक नहीं बताया और उन्हें 'ज़हर' तक कह डाला।
वायरल क्लिप में उन्होंने कहा, "हां, मैं रेगुलर खाना नहीं खाती, मुझे देसी खाना ज़हर लगता है।"
जब भी पारंपरिक पकवानों का ज़िक्र होता, तो उनके नाटकीय रिएक्शन ने भी लोगों का ध्यान खींचा। फ़रिहा बार-बार मुँह बनातीं, 'eww' और 'oh please' कहतीं और बातचीत के दौरान साफ़ तौर पर असहज दिखतीं। कई दक्षिण एशियाई लोगों के लिए दाल-चावल सिर्फ़ एक खाना नहीं है - यह एक कम्फर्ट फ़ूड है, घर-घर का पसंदीदा है और अक्सर थका देने वाले दिन के बाद लोग यही खाना पसंद करते हैं। इसलिए, फ़रिहा की इस खाने के प्रति नफ़रत लोगों को चुभ गई।
कौन हैं फ़रिहा फ़ारुख़?
फ़रिहा ने पत्रकारिता और राजनीतिक कमेंट्री में अपनी पहचान बनाई है। उनके लिंक्डइन प्रोफ़ाइल के मुताबिक, वह एक पाकिस्तानी टीवी प्रेज़ेंटर, पत्रकार, रक्षा और जियोपॉलिटिक्स कमेंटेटर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर डिग्री और जर्नलिज़्म में बैचलर डिग्री हासिल की है।
इन सालों में, उन्होंने डेली टाइम्स जैसे पब्लिकेशन्स के लिए काम किया है और अपना खुद का डिजिटल प्रोग्राम 'कॉफ़ी विद फ़रिहा' होस्ट करती हैं। वह 360 डिजिटल इंग्लिश से भी जुड़ी हैं, जहां वह अक्सर क्षेत्रीय राजनीति, सैन्य मामलों और भारत, चीन और अमेरिका जैसे देशों के साथ पाकिस्तान के विदेश नीति संबंधों पर चर्चा करती हैं।
फ़रिहा की सोशल मीडिया पर भी अच्छी-खासी मौजूदगी है, इंस्टाग्राम पर उनके 2.8 लाख से ज़्यादा फ़ॉलोअर्स हैं। पत्रकारिता के अलावा, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय शांति की वकालत करने वाली पहलों में भी हिस्सा लिया है और पहले ग्लोबल पीस एलुमनाई नेटवर्क के लिए असिस्टेंट ग्लोबल कोऑर्डिनेटर के तौर पर भी काम कर चुकी हैं।
