PM Modi Iran statement: नयी दिल्ली में Belgian PM Bart De Wever संग प्रेस वार्ता में PM Narendra Modi ने कहा, “यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, हम संघर्षों के शीघ्र अंत और शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करते हैं।” ईरान संघर्ष में हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की रोक, 28 फरवरी की शुरूआत और SCO में Masoud Pezeshkian से उनकी मुलाकात का उल्लेख भी हुआ।
SCO Summit Bishkek: रूस-यूक्रेन युद्ध, इजराइल-गाजा संघर्ष और अमेरिका-ईरान टकराव के बीच भारत ने एक बार फिर वैश्विक संघर्षों को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि किसी भी संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। उन्होंने खास तौर पर यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के जल्द अंत की जरूरत पर जोर दिया। प्रधानमंत्री का यह बयान नई दिल्ली में बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान आया। बेल्जियम के प्रधानमंत्री भारत के तीन दिवसीय राजकीय दौरे पर पहुंचे हैं।
Belgium PM Bart De Wever के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत यूक्रेन से लेकर पश्चिम एशिया तक संघर्षों के शीघ्र अंत और शांति की दिशा में किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन करता है। उन्होंने कहा, “यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, हम संघर्षों के शीघ्र अंत और शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करते हैं।” भारत का यह रुख लंबे समय से संवाद, कूटनीति और तनाव कम करने पर केंद्रित रहा है। नई दिल्ली लगातार यह संदेश देती रही है कि जटिल अंतरराष्ट्रीय विवादों का स्थायी समाधान बातचीत के जरिए ही तलाशा जाना चाहिए।
Iran Conflict ने बढ़ाई वैश्विक चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े टकराव ने पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजारों और व्यापारिक मार्गों को लेकर भी चिंता बढ़ाई है। खास तौर पर Strait of Hormuz यानी हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर पैदा हुआ संकट बेहद महत्वपूर्ण है। यह मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए अहम माना जाता है। यहां किसी भी तरह की रुकावट से कच्चे तेल की सप्लाई, शिपिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर असर पड़ सकता है। भारत के लिए भी पश्चिम एशिया की स्थिति अहम है, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक इस क्षेत्र में रहते हैं और ऊर्जा आपूर्ति तथा समुद्री व्यापार के लिहाज से यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है।
28 फरवरी से बढ़ा तनाव
दिए गए घटनाक्रम के मुताबिक, 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान में कई ठिकानों पर समन्वित हमलों के बाद स्थिति तेजी से बिगड़ी। इसके बाद ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आईं। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर पैदा हुए तनाव ने पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को और जटिल कर दिया। इस बीच रूस-यूक्रेन युद्ध और इजराइल-गाजा संघर्ष पहले से ही अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बने हुए हैं।
SCO Summit में Pezeshkian से मिले थे PM Modi
इस महीने की शुरुआत में किर्गिस्तान के बिश्केक में हुए SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की थी। बैठक के बाद PM Modi ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा था कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चली आ रही मित्रता को विभिन्न क्षेत्रों में और मजबूत करने का संकल्प दोहराया गया है। उन्होंने व्यापार को विस्तार देने और उसमें विविधता लाने की इच्छा भी जाहिर की थी। ईरान की मौजूदा स्थिति पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत स्थायी शांति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किए जाने वाले सभी प्रयासों का समर्थन जारी रखेगा।
मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है भारत?
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की कूटनीतिक भूमिका पर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर है। भारत के अमेरिका, यूरोप, रूस, ईरान और खाड़ी देशों के साथ अलग-अलग स्तर पर संबंध हैं। ऐसे में नई दिल्ली संवाद और तनाव कम करने की कोशिशों में एक संभावित सेतु की भूमिका निभा सकती है। हालांकि, भारत ने औपचारिक रूप से खुद को किसी संघर्ष में मध्यस्थ के रूप में पेश करने के बजाय शांति, संवाद और कूटनीति के समर्थन पर जोर दिया है।
ऊर्जा और नागरिकों की सुरक्षा भारत की प्राथमिकता
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए अपने नागरिकों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और माल की निर्बाध आवाजाही अहम प्राथमिकताएं हैं। हॉर्मुज़ जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर लंबे समय तक तनाव रहने से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे माहौल में भारत का जोर क्षेत्र में तनाव कम करने और बातचीत के जरिए स्थायी समाधान तलाशने पर है। रूस-यूक्रेन से लेकर पश्चिम एशिया तक एक साथ कई संघर्षों के बीच PM Modi का ताजा बयान इसी व्यापक भारतीय नीति को दोहराता है- युद्ध का समाधान युद्ध नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति के जरिए तलाशना चाहिए।
